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Siddharthnagar News: मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट खराब... तीसरी मंजिल पर सीढि़यां चढ़कर जा रहीं गर्भवती

Fri, 09 Feb 2024 12:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट खराब होने के कारण सीढी से जाते डायलिसिस और सर्जिकल वार्ड के मरीज।
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सिद्धार्थनगर। आप कैमरे की जद में हैं का स्लोगन महिला अस्पताल में लागू तो होता है। लेकिन 32 कैमरों पर नजर रखने वाले और अधिकारियों को मरीज का दर्द तीन दिन से दिखाई नहीं दे रहा है। या फिर वह आंखें बंद किए हुए हैं। तीन दिन से लिफ्ट खराब है। किसी को फिक्र नहीं है। पेट में नौ माह का बच्चा लेकर प्रसूता सीढि़या चढ़ रही हैं। उन्हें उनके परिजन कंधे से पकड़कर तीसरे तल पर ले जा रहे हैं। वह असहनीय दर्द से कराह रही हैं। इसके बावजूद महिला हिम्मत करके अपने आने वाले बच्चे के लिए सीढि़यां चढ़ रही हैं। लिफ्ट तीन माह पहले भी खराब हो चुकी है। तब भी मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ा था।
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ये हाल शहर के माधव प्रसाद मेडिकल काॅलेज के महिला अस्पताल का है। वहां पर प्रथम तल पर महिला वार्ड न होकर तृतीय तल पर है। जबकि प्रथम तल पर कोई वार्ड नहीं है। प्रथम तल पूरी तरह से खाली है। यदि प्रथम तल पर महिला वार्ड होता तो लिफ्ट का झंझट ही नहीं होता और शायद मरीजों को इतनी दिक्कत नहीं झेलनी पड़ती। अस्पताल प्रशासन ने महिला वार्ड को जिला अस्पताल से यहां शिफ्ट करते समय तीसरे तल पर क्यों बनाया समझ से परे है। रैंप भी इस तरह से बनाया है कि उसका रास्ता दूसरी जगह से बनाया गया है। ऊपर से आए दिन लिफ्ट खराब हो जाता है।
लिफ्ट खराब होने से रैंप से चढ़कर कोई जाना पसंद नहीं करता है। अब प्रसूता और उसके परिजनों के लिए सीढ़ी ही एकमात्र विकल्प है। यह मुश्किल स्थिति केवल एक मरीज के साथ ही नहीं, बल्कि डिलीवरी, टांका कटाने और दिखाने के लिए आने वाले 30 से 60 मरीज तीन दिन से झेल रहे हैं। यही नहीं उनके साथ तीमारदारों में बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं भी होती हैं। वो भी दर्द सहते हुए अपने आने वाले नाती पोतों के लिए इसी सीढ़ी से चढ़कर ऊपर जाते हैं।
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यही हाल जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग का भी है। वहां की भी लिफ्ट काफी दिनों से बंद है। वहां तृतीय तल पर किडनी खराब हाने के कारण डायलिसिस के मरीज या तो रैंप से या फिर सीढ़ी चढ़कर जाते हैं। दूसरे तल पर सर्जिकल वार्ड है और पहले तल पर पोषण पुनर्वास स्थित है। यहां रोजाना 100 से ज्यादा मरीज अपने परिजनों के साथ आते हैं। यहां आने वाले मरीज और तीमारदार इस समस्या से जूझ रहे हैं।
मेडिकल काॅलेज के महिला वार्ड में भर्ती होने के लिए सीढि़यां चढ़ रही इटवा की सुषमा को देखकर लोगों को भी उसके दर्द का अहसास हो रहा था। साथ आए देवर और परिजन भी बड़ी मुश्किल से उसे सीढि़यां चढ़ा रहे थे। लेकिन अस्पताल प्रशासन उनके दर्द को जानकर भी बेखबर है। हालांकि बच्चा होने के बाद महिलाएं अपने सारे दर्द भूल जाती हैं।
वार्ड में जिन महिलाओं की डिलीवरी के बाद बच्चे हो गए थे। वह खुश नजर आ रहीं थीं। वहां मौजूद परिजन और उनको देखने आने वाले रिश्तेदार भी बच्चे को गोद में लेकर खिला रहे थे। उनके चेहरों पर एक अलग तरह की खुशी थी। उनमें से एक मोमिना खातून है। जिनको एक दिन पहले बच्चा हुआ है। उनके पति अब्दुल खातून उनके साथ मौजूद थे। सनई चौराहे के अजीत अपनी भतीजी को एडमिट कराने आए हुए थे।


हम यहां प्रसूता को आज भर्ती कराने आए थे। लिफ्ट खराब होने से सीढि़यों से चढ़कर जाना पड़ा। भाभी को बहुत दर्द था। लेकिन क्या करें जैसे -तैसे बड़ी मुश्किलों से उन्हें ऊपर महिला वार्ड तक लेकर आएं हैं।
-सुषमा के देवर


अभी एक दिन पहले ही हमारी बीबी को बच्चा हुआ है। लिफ्ट न चलने के कारण बहुत दिक्कत हो रही है। दवा या कोई सामान लेना हो तो सीढि़यों से आते जाते हैं।
-अब्दुल मोइद


मेरी भतीजी एडमिट है। लिफ्ट नहीं चलने से ऊपर नीचे जाने में परेशानी हो रही है। खासकर बूढ़े लोगों को तृतीय तल तक चढ़ने उतरने में परेशानी हो रही है।
-अजय


पुराने भवन में बनी लिफ्ट डेड हो गई है। उसके स्थान पर नई लिफ्ट बनवाने के लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है। एमसीएच विंग के लिफ्ट में सीमेंट गिरने से खराब हो गई है। जिस कंपनी का टेंडर है। उसको बुलाया गया है। जल्द ही लिफ्ट सही करवा दिया जाएगा।
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-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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