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Siddharthnagar News: कार्रवाई न होने से धंधेबाज बेखाैफ, खोल दिया सील अस्पताल

Thu, 27 Aug 2026 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जिले के निजी अस्पतालों में मरीजों का शोषण और लापरवाही से जान जाने का सिलसिला जारी है। कार्रवाई में शिथिलता और विभागीय लचरता से संचालकों के हौसले बुलंद हंै। इटवा में इलाज में लापरवाही और मौत के बाद सील अस्पताल को खोलने की कोशिश की गई तो वहीं मोहाना में निजी अस्पताल में इलाज में लापरवाही के बाद डॉक्टर से विरोध जताया गया तो मारने की धमकी दी गई।
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ऐसे ही पहले खेसरहा में जल्दबाजी में किए ऑपरेशन से प्रसूता की जान चली गई। मामला जांच कमेटी के गठन और जांच कराने तक सीमित रहा है। जानकारों का कहना है कि मामला सामने आने के बाद पहले जिम्मेदार पीछे हट जाते हैं फिर थककर परिवार भी मन मसोसकर रह जाता है। ऐसे में संचालकों पर कार्रवाई न होने से उनके हौसले बुलंद हैं और गरीबों की जिंदगी से खेलने का काम जारी है।
जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा करने वाले कस्बा, बाजार और चौराहों पर तेजी से अस्पताल खुल रहे हैं। जहां बड़े डॉक्टरों का बोर्ड और बेहतर इलाज का दावा करके मरीजों को फंसाया जा रहा है। उनकी हकीकत तब सामने आती है, जब किसी मरीज के साथ अनहोनी हो जाती है। इसके बाद जांच और कार्रवाई शुरू होती है तो अस्पताल बिना लाइसेंस के मिलता है। इसमें कई अस्पतालों में डॉक्टर और इलाज से जुड़े कागजात भी नहीं मिलते हैं।
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एक पखवारा के बीच तीन मामले ऐसे आए, जिसने व्यवस्था पर सवाल उठा दिया। इटवा में सील अस्पताल को खोलकर इलाज का प्रयास किया गया। मोहाना थाना क्षेत्र में पहले इलाज में लापरवाही और मरीज की ओर से प्रतिक्रिया दी गई तो धमकी दी गई। इन मामलों में कमेटी गठित कर दी गई। अब कार्रवाई होना बाकी है।
सील अस्पताल खुला मिला : इटवा कस्बे में जनता अस्पताल का दरवाजा मंगलवार को खुला मिला। इसे देखकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए। भीड़ की सूचना पर नजदीकी थाने की पुलिस भी पहुंची। इस दौरान अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों के बीच कहासुनी हो गई। पुलिस ने अस्पताल संचालक राकेश यादव को थाने ले जाकर शांतिभंग में कार्रवाई की। सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल रात करीब 11:30 बजे अस्पताल पहुंचे और मौके की जांच की। उन्होंने बताया कि अस्पताल की सील टूटी मिली। डस्टबिन में मिले अवशेषों को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि निरीक्षण से करीब दो घंटे पहले किसी महिला का ऑपरेशन किया गया था।
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