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पहली बार गोदामों पर पहुंचेगा कालानमक धान का बीज

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पहली बार गोदामों पर पहुंचेगा कालानमक धान का बीज
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सिद्धार्थनगर। जिले के सरकारी गोदामों पर पहली बार काला नमक धान का बीज उपलब्ध होगा। इस बीज को कृषि विभाग ने वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया है। फिलहाल कालानमक धान के बीज की बिक्री दर तय नहीं है। किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर प्रमाणित बीज प्राप्त होगा। कृषि विभाग जल्द ही गोदामों को बीज आवंटित करेगा।
किसानों ने धान की खेती के लिए नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने कालानमक बीज तैयार करने की घोषणा की थी। इस कारण किसान, बीज के इंतजार में हैं। कृषि विभाग ने राजकीय कृषि प्रक्षेत्र में चार हेक्टेयर रकबा में बीज तैयार किया है। इस बार 60 क्विंटल बीज तैयार किया गया है। कालानमक चावल को एक जिला एक उत्पाद प्रोत्साहन योजना में शामिल करने के बाद बाद पहली बार गोदामों में बीज पहुंचा है, जिसे कृषि प्रक्षेत्र में तैयार किया गया है।
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कृषि विभाग ने खरीफ की फसल की तैयारी शुरू कर दी है। 12 मई से जिले के 14 सरकारी गोदामों पर बीज उपलब्ध हो जाएगा, जबकि कालानमक धान का बीज 15 मई से प्राप्त होगा। कृषि विभाग ने पैकिंग कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। कालानमक चावल की लंबी डंठल के प्रमाणित बीज को प्राप्त करने के लिए किसानों में उत्साह है। कृषि विभाग से बीज प्राप्त नहीं होने पर किसानों अपने खेत में पैदा धान को ही बीज के रूप प्रयोग करते रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय सिंह ने बताया कि प्रमाणित बीज से धान की पैदावार बढ़ेगी और किसानों को लाभ होगा।
जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने कहा कि कालानमक प्रजाति सहित धान की छह प्रजाति के बीज गोदामों से उपलब्ध हो जाएंगे। कालानमक धान बीज का बिक्री दर जल्द ही तय हो जाएगा। 15 मई से गोदामों से कालानमक प्रजाति का बीज उपलब्ध होगा।
नए किसानों को 34 क्विंटल बीज
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में धान के बीज तैयार किए गए हैं। इस बार कालानमक धान की प्रजाति के 34 क्विंटल बीज नए किसानों को देने की योजना है। केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी वर्मा ने बताया कि शासन से बिक्री दर प्राप्त नहीं हुई है। दर प्राप्त होने के बाद किसानों का चयन कर कालानमक धान दिया जाएगा। ऐसे किसानों को समय समय पर वैज्ञानिक सलाह भी दी जाएगी।
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छह प्रजाति के धान
जिले के सरकारी गोदामों पर कालानमक सहित छह प्रजाति बीज उपलब्ध होंगे। इनमें लंबी एवं कम अवधि की प्रजातियां भी शामिल हैं। सांभा सब -1 (135-140 दिन), वीपीटी 5204 (130-135 दिन), एमक्यू (145 दिन), एचकेआर 47 (125 दिन) एवं नई प्रजाति ईओ 51 है, जो 110-115 दिन में हो जाएगी।
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