आधी आबादी को नहीं मिली राजनीतिक भागीदारी
सिद्धार्थनगर। आधी आबादी को राजनीतिक रूप से सबल बनाने के दावों और वादों से इतर जिले की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम ही रही है। जिले की पांच विधान सभाओं में आजादी के बाद से अब तक पुरुषों का ही दबदबा रहा। वर्ष 2017 में हुई 17वीं विधानसभा चुनाव तक जिले की केवल तीन महिलाएं ही जीत हासिल कर पाईं। इस बार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में भी महिला दावेदार कम नजर आ रही हैं।
महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देने का शोर राजनीतिक दल भले मचाते हों लेकिन हकीकत इससे उलट है। पार्टियां अपनी चुनावी गुणा-गणित के अनुसार ही उम्मीदवारों को टिकट देना ज्यादा मुफीद समझती हैं। इसी का नतीजा है कि जिले की राजनीति में भी महिलाओं की हिस्सेदारी नहीं हो पाई है। जिले में मौजूद पांच विधानसभा क्षेत्रों में से शोहरतगढ़ और डुमरियागंज इस मामले में जरूर अपवाद साबित हुए हैं।
शोहरतगढ़ विधान सभा सीट पर वर्ष 1980, 1985 और 1989 में हुए चुनावों में कमला साहनी कांग्रेस के टिकट पर जीतकर लगातार तीन बार विधायक बनीं। इसी सीट से वर्ष 2012 में हुए चुनाव में सपा के टिकट से चुनाव जीतकर लालमुन्नी सिंह विधान सभा पहुंचने में सफल रहीं। शोहरतगढ़ से ही भाजपा के टिकट पर साधना चौधरी ने भी किस्मत आजमाने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाईं। शोहरतगढ़ के अलावा जिले की डुमरियागंज विधान सभा सीट ही ऐसी है, जहां से केवल एक बार महिला विधायक चुनी गईं।
विधायक तौफीक अहमद के निधन के बाद वर्ष 2010 में हुए उप चुनाव में बसपा उम्मीदवार खातून तौफीक ने जीत हासिल की। इन तीन नामों के अलावा जिले की राजनीति में महिलाओं की सशक्त मौजूदगी नहीं देखी गई। वहीं, बाकी तीन विधानसभा क्षेत्र इटवा, बांसी और कपिलवस्तु की बात करें तो यहां आजादी से लेकर अभी तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में एक भी महिला जनप्रतिनिधि नहीं चुनी गई।
इस बार भी कमजोर दिख रही महिलाओं की दावेदारी
सिद्धार्थनगर। मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए आगामी विधान सभा चुनाव में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं, हालांकि, इस बीच लड़की हूं, लड़ सकती हूं... का नारा देने वाली कांग्रेस पार्टी ने डुमरियागंज सीट से कांती पांडेय को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इसी सीट पर बसपा से सपा में शामिल हुईं सैय्यदा खातून अभी पार्टी आलाकमान के फैसले के इंतजार में हैं। इटवा विधानसभा की बात करें तो प्रमुख राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ने की चर्चा में चल रहे नामों में महिला उम्मदीवार नदारद हैं।
वहीं, बांसी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व सपा से एक-एक महिलाओं की दावेदारी चर्चा में है। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां भी महिला उम्मीदवारों को लेकर सिर्फ कयासबाजियों का दौर जारी है। केवल कांग्रेस पार्टी से ही दो महिला दावेदारों के नाम चर्चा में आ रहे हैं, जबकि कपिलवस्तु (सु.) सीट पर कांग्रेस को छोड़ दें तो अन्य सारे प्रमुख दलों में किसी भी महिला दावेदार का नाम सामने नहीं आ रहा है। केवल कांग्रेस से एक मात्र महिला नेता ही टिकट की दौड़ में शामिल हैं।