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‘हमें तुम गंगाजल दो, तुम्हें हम जमजम देंगे...’

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डुमरियागंज में मुशायरे में अपनी रचना प्रस्तुत करतीं सबा बलरामपुरी। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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‘हमें तुम गंगाजल दो, तुम्हें हम जमजम देंगे...’
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डुमरियागंज। राजकीय कन्या इंटर कॉलेज डुमरियागंज के मैदान में ‘एक शाम अखिलेश यादव के नाम’ ऑल इंडिया कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में नामचीन कवि और शायरों ने हिस्सा लिया। सद्भावना कमेटी के तत्वाधान में कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित करके सपा महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी व आजाद अहमद ने किया।
कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की शुरूआत नज्म से करते हुए स्थानीय शायर सरफराज राही ने सुनाया, ‘जिंदाबाद, वतन जिंदाबाद, तुझ से दुनिया ने अपना संवारा चलन जिंदाबाद ए वतन...।’ उसके बाद सज्जाद हल्लौरी ने अपनी शायरी से लोगों को आकर्षित करते हुए सुनाया, ‘भारत के सपूतों की जागीर नहीं देंगे, हम जान तो दे देंगे मगर कश्मीर नहीं देंगे।’ बस्ती के कुमार विश्वास ने अपनी कविता के जरिए कहा, ‘तुम्हारे ख्वाब की खातिर मुझे सोना भी पड़ता है, तुम्हारी याद में अक्सर मुझे रोना भी पड़ता है।’ असद बस्तवी ने एक से बढ़कर एक शायरी पेश करते हुए सभी का मन मोह लिया। उनकी एक एक शायरी पर लोग तालियां बजाते रहे। उन्होंने पढ़ा कि ‘मोहब्बत-प्यार का हिसार का परचम तुम्हें देंगे, हमें तुम गंगाजल दो, तुम्हें हम जमजम देंगे।’
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आबाद सुल्तानपुरी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा, ‘पूछ रहा मजदूर यहां पर कब अच्छे दिन लाओगे, विदेश से काला धन कब लाओगे।’ युवा शायर शहजादा कलीम प्रतापगढ़ी ने भी अपनी दमदार आवाज से लोगों का मन मोहा। उन्होंने पढ़ा, ‘जो मंदिर और मस्जिद पर सियासतदार करते हैं, यह सच है अपने ही मसलों से वह गद्दार करते हैं, यह हिंदुस्तान की मिट्टी है, यहां एक चटाई पर मुसलमान और हिंदू बैठकर अफ्तार करते हैं।’ संचालन कर रहे नदीम फारूक ने आजाद प्रतापगढ़ी को आवाज दी तो उन्होंने अपना शेर कुछ यूं सुनाया, ‘हवा का जोर सदा एक सा नहीं रहता, कब तलक ये चिरागों को आजमाएगी।’
मुशायरे की महफिल का माहौल देखकर हंसी के शायर विकास बौखल को आवाज दी गई तो उन्होंने एक से बढ़कर एक शेर व चुटकुले सुनाकर लोगों को हंसने पर मजबूर कर दिया। शायर व गीतकार जौहर कानपुरी को जब मंच पर आवाज दी गई तो पूरा पंडाल तालियों से गूंज गया। उन्होंने सुनाया, ‘अंगारों को फूल बनाया जाएगा, यह नारा मकबूल बनाया जाएगा, बाद होगी मंदिर-मस्जिद की तामीर, पहले एक स्कूल बनाया जाएगा।’ रात के अंतिम पड़ाव में शायर शाइस्ता सना व सबा बलरामपुरी ने जब मंच को संभाला तो उनके एक-एक शेर पर तालियां बजती रहीं।
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मुशायरे में हाशिम फिरोजाबादी, यासिर सिद्दीकी ने भी अपने कलाम पेश किए। इस दौरान विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, पूर्व मंत्री मुनीर अहमद खान, विजय पासवान, आयोजन रामकुमार उर्फ चिन्कू यादव, चमन आरा, जमील सिद्दीकी, डॉ. एहसान, डॉ. कमाल, पप्पू मलिक, दीनेंद्र दत्त उर्फ छोटे यादव, नफीस अहमद उर्फ गुड्डू मलिक, रघुनंदन पांडेय, मुस्तकीम, आफताब कुरेशी आदि मौजूद रहे।
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