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Siddharthnagar News: रजिस्ट्री से पहले संभाल लें दस्तावेज, आधार से नहीं साबित होंगे पारिवारिक संबंध

Sat, 27 Jun 2026 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जिले में अब संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को आधार कार्ड के साथ पारिवारिक संबंध से जुड़े अन्य वैध दस्तावेज भी तैयार रखने होंगे। महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि आधार कार्ड पर दर्ज पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री या अभिभावक का नाम पारिवारिक संबंध का वैधानिक प्रमाण नहीं माना जाएगा। सिद्धार्थनगर समेत प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
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जिले में सदर समेत कुल पांच उपनिबंधक कार्यालय संचालित हैं, जहां हर महीने औसतन 1800 से 2000 रजिस्ट्रियां होती हैं। इनमें बड़ी संख्या पारिवारिक बंटवारे, उत्तराधिकार और रिश्तेदारों के बीच संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े मामलों की भी रहती है। पारिवारिक सदस्यों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टांप शुल्क में मिलने वाली रियायत के लिए संबंध का प्रमाण देना होता है। ऐसे मामलों में कई बार आधार कार्ड पर दर्ज रिश्ते का भी हवाला दिया जाता था। अब नए निर्देशों के बाद केवल आधार कार्ड के आधार पर संबंध का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। संबंधित व्यक्ति को जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या अन्य सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।
निर्देश के अनुसार आधार कार्ड का उपयोग केवल व्यक्ति की पहचान और पते के प्रमाण के रूप में किया जाएगा। यदि किसी प्रकरण में पारिवारिक संबंध का सत्यापन आवश्यक है तो केवल आधार कार्ड के आधार पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
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महानिरीक्षक निबंधन ने जारी आदेश में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि आधार पर दर्ज एस/ओ (पुत्र), डी/ओ (पुत्री), डब्ल्यू/ओ (पत्नी) या पिता, पति या अभिभावक का नाम केवल सूचनात्मक विवरण है। इसे किसी भी स्थिति में संबंध का कानूनी या वैधानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
उपनिबंधक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि महानिरीक्षक निबंधन के निर्देशों के अनुसार अब आधार कार्ड को केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा। यदि किसी रजिस्ट्री में पारिवारिक संबंध के आधार पर कोई दावा किया जाता है तो उसका सत्यापन जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या अन्य वैध अभिलेखों से किया जाएगा। नए निर्देशों का सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में पालन कराया जा रहा है।
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पांच प्रमुख बातें
- आधार कार्ड अब केवल पहचान और पते के प्रमाण के रूप में मान्य होगा।
- आधार पर दर्ज पिता, पति, पत्नी या अभिभावक का नाम संबंध का कानूनी प्रमाण नहीं माना जाएगा।
- रिश्ते साबित करने के लिए जन्म प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र या अन्य वैध दस्तावेज देने होंगे।
- पारिवारिक रजिस्ट्री में स्टांप शुल्क की रियायत के दावे में अब केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा।
- सिद्धार्थनगर समेत प्रदेश के सभी रजिस्ट्री कार्यालयों में नए निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
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जिले में किन-किन मामलों की होती है रजिस्ट्री
- क्रय-विक्रय (बैनामा): जमीन, मकान या दुकान की खरीद-बिक्री।
- उपहार (गिफ्ट डीड): माता-पिता, पति-पत्नी या अन्य व्यक्ति द्वारा संपत्ति उपहार में देना।
- पारिवारिक हस्तांतरण: परिवार के सदस्यों के बीच संपत्ति का हस्तांतरण, जिस पर नियमानुसार स्टांप शुल्क में रियायत मिलती है।
- बंटवारा (विभाजन पत्र): संयुक्त संपत्ति का परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारा।
- वसीयत/उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज: वसीयत के आधार पर या उत्तराधिकार से जुड़े मामलों का पंजीकरण।
- बंधक (मॉर्गेज): बैंक या वित्तीय संस्था के पास ऋण के लिए संपत्ति गिरवी रखने से संबंधित दस्तावेज।
- लीज/पट्टा: निर्धारित अवधि के लिए भूमि या भवन का पंजीकृत पट्टा।
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