बाजार में अच्छी कीमत, सरकारी से किसानों का मोहभंग
60 से 115 रुपये प्रति क्विंटल घाटे में आढ़तियों को गेहूं बेच रहे किसान
ऑनलाइन और सरकारी पर नंबर लगाने से मुक्ति के लिए बाजार में कर रहे मोलभाव
जिले में अब तक सरकारी क्रय केंद्र पर हुई है 2356 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सरकारी क्रय केंद्रों पर नंबर लगाने और दिक्कतों से बचने के लिए इस बार किसान आढ़तियों के यहां गेहूं बेच रहे हैं। 60-115 प्रति क्विंटल घाट सहकर किसान अपनी उपज बाजार में बेच रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर सरकारी क्रय केंद्र पर ले जाएंगे तो कम से कम 50 रुपये प्रति क्विंटल खर्च करना पड़ेगा। 2015 रुपये प्रति क्विंटल सरकारी है, जबकि 1900 से 1950 तक अढ़तिया खरीद ले रहे हैं। सरकारी केंद्र पर किसानों के न पहुंचने से विभाग को लक्ष्य पूरा करने की चिंता सता रही है, क्योंकि खरीद के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे निराशाजनक हैं। लक्ष्य 90 हजार मीट्रिक टन है। जबकि खरीद शुरू हुए 20 दिन का वक्त गुजर चुका है। अभी महज 2356 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई है। ऐसे में लक्ष्य कैसे पूरा होगा। यह विभाग के लिए चुनौती से कम नहीं है।
जिले में खरीद के लिए बने हैं इतने क्रय केंद्र
हर किसान की उपज का वाजिब मूल्य मिले। इसके लिए शासन की ओर से पूरी खरीद व्यवस्था डिजिटल कर दी गई है। ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले किसान की ही खरीद होनी है। किसान अपने घर के नजदीक अपनी उपज बेच सकें। इसके लिए जिले में 132 क्रय केंद्र संचालित हो रहे हैं।
क्यों सरकारी केंद्र पर नहीं जा रहे किसान
इस बार अति बारिश और अन्य वजह से फसल उत्पादन कम हुआ है। साथ ही बाजार रेट भी मौजूदा समय में अच्छा है। ऐसे में किसान आढ़तियों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं। कारण सरकारी केंद्र पर बेचने के लिए सभी दस्तावेज के साथ पहले ऑनलाइन कराएं। फिर अधिकारी उसका सत्यापन करेंगे। इसके बाद केंद्र पर जाकर नंबर के लिए परेशान हों। फायदा बाजार भाव से 60 से 115 रुपये। इसलिए इन समस्याओं को देखते हुए बिना किसी रिस्क के घर पर ही गेहूं तौल दे रहे हैं। उन्हें तत्काल रुपये भी मिल जा रहे हैं।
इतने किसानों से हुई अब तक इतनी खरीद
आंकड़ों के मुताबिक जो जिले में अब तक सरकारी क्रय केंद्र पर खरीद हुई है। उसमें अब तक 376 किसान ही सरकारी क्रय केंद्र पर तौन कराए हुए हैं। उनकी कुल खरीद 2356 मीट्रिक टन हुई है।
जिले में हैं लगभग इतने किसान
आंकड़ों के मुताबिक जिले में दो लाख से अधिक किसान हैं, जो खेती पर निर्भर हैं। लेकिन सरकारी क्रय केंद्र पर उपज बेचने में इनकी कोई रुचि नहीं है। ये गेहूं बेचने के लिए आवेदन करने वाले किसानों के आंकड़े तस्दीक कर रहे हैं। क्योंकि जिले में अब तक 5501 किसान ही पंजीकरण कराएं हैं। इसमें शोहरतगढ़ 814, नौगढ़ 985, बांसी 1350, इटवा 833, और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में 1519 किसानों ने पंजीकरण कराया है।
बोले किसान
सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं का मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल है। प्राइवेट दुकानदार 1900 से 1950 तक खरीद ले रहे हैं। प्राइवेट दुकान पर भले ही 100 और 50 रुपये कम मिल रहे हैं लेकिन जरूरत पर रुपये मिल जा रहे हैं।
-जेपी विश्वकर्मा, निवासी मुसुक्काबाद
सरकारी दुकान पर गेहूं बेचने के लिए जाए तो कागज, सूखा आदि का बहाना बनाकर दौड़ाते थे, लेकिन अब प्राइवेट दुकान पर 1900 से लेकर 1950 तक बिक जा रहा है और रुपये के लिए दौड़ना भी नहीं पड़ता है।
-रामबेलास, निवासी कलवारी
पहले मैं सरकारी दुकान पर ही गेहूं बेचता था, लेकिन अबकी बार सरकारी क्रय केंद्र और प्राइवेट दुकान पर मूल्य की तुलना में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। न ही बेचने में कोई झमेला है। क्रय केंद्र की भागदौड़ नहीं करनी पड़ रही है।
-सतीश चौधरी, निवासी देवरा चौधरी
अबकी बार मैंने 40 क्विंटल गेहूं को अपने खेत से ही 1930 में बेच दिया। सरकारी पर बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन, नंबर आदि कार्यों के लिए क्रय केंद्रों को चक्कर भी नहीं लगाना पड़ा और रुपये भी तुरंत मिल गए। दिक्कत नहीं हुई।
-केसरी पांडेय, निवासी विशुनपुर
कोट
किसानों को सरकारी क्रय केंद्र अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसी भी किसान को तौल में असुविधा न हो, इसके लिए सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। फिर अगर किसी किसी को कोई समस्या होती है तो उसका निस्तारण किया जाएगा।
-अजय प्रताप सिंह, जिला विपणन अधिकारी