जलस्तर घटने से नदियों के किनारे कटान तेज
सिद्धार्थनगर। जलस्तर घटने के साथ ही नदियों के किनारे कटान तेज हो गई है। इससे जो लोग अब तक बाढ़ के पानी से त्रस्त थे, अब वे कटान से भयभीत हैं। उधर जलस्तर घटने के बावजूद राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी खतरे के लाल निशान से ऊपर हैं।
जलस्तर घटने के बावजूद राप्ती 21वें दिन खतरे के लाल निशान से 86 सेमी ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर लाल निशान से 1.24 मीटर ऊपर था। वहीं कूड़ा नदी भी लाल निशान से 40 सेमी ऊपर बह रही थी। नदियों का जलस्तर घटने से लोगों ने बांधों के टूटने का खतरा टलने और जलभराव में कमी आने से राहत महसूस की। वहीं पर जोगिया और उसका आदि क्षेत्रों में नदियों किनारे कटान शुरू होने से लोग भयभीत हैं। बांसी क्षेत्र में बांधों पर मंडरा रहा खतरा टलने से लोगों ने खुशी जाहिर की।
डुमरियागंज प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र के राप्ती नदी में आई बाढ़ के पानी से घिरे रसूलपुर गांव में खपरैल के छह मकान ध्वस्त हो गए। गांव निवासी रामविलास, सुभाष, मोमिना खातून, नर्वदेश्वर, मोहम्मद तसलीम और सलामतुल्लाह के खपरैल के मकान गिर गए। परिवार के सदस्य खुले में रहने के लिए मजबूर हैं। लेखपाल बृज किशोर तिवारी ने बताया कि बाढ़ग्रस्त रसूलपुर में आधा दर्जन खपरैल के मकान ध्वस्त हुए हैं, जिनकी रिपोर्ट तहसीलदार को प्रेषित कर दी गई है।
बिजौरा प्रतिनिधि के अनुसार, बाढ़ के पानी से कई दिनों से घिरी क्षेत्र के कई गांवों के किसानों की फसल बर्बाद हो गई है। ग्राम सिंगारजोत, सफीपुर, दखिन्हवा, सिकंदरपुर, कुर्सिडीहा, मछली गांव, मनिककौरा, गुलरिहा, गागापुर, आजादनगर डिहवा, बिजौरा, कटरिया पांडेय आदि गांवों की फसल को बर्बाद हुई है। किसान मसौव्वर अली, सर्वदेव तिवारी, खदेरू चौरसिया, चिनकू तिवारी और ओमप्रकाश दुबे आदि का कहना है कि फसल बर्बाद हो गई है। उपजिलाधिकारी डुमरियागंज त्रिभुवन ने बताया कि फसल क्षति का सत्यापन जल्द ही कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।