संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। खेसरहा विकास खंड क्षेत्र के कोटिया पांडेय गांव में चल रहे नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा छठवें दिन बुधवार को कथा व्यास पं. इंद्रदेव मिश्र ने भगवान कृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। गोवर्धन पर्वत उठाने तथा देवराज इंद्र के अभिमान के निवारण की कथा विस्तार से सुनाया। कथा सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो उठे ।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान कृष्ण का अवतार धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए हुआ था। उन्होंने बाल्यकाल से ही अपनी अद्भुत लीलाओं के माध्यम से यह संदेश दिया कि ईश्वर अपने भक्तों की हर संकट में रक्षा करते हैं। उन्होंने पूतना वध, शकटासुर वध, त्रिणावर्त दैत्य के संहार और माखन चोरी की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि नन्हे कृष्ण की हर लीला में गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है। जब गोकुल और वृंदावन के लोग हर वर्ष देवराज इंद्र की पूजा करते थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमें अपने पालनकर्ता गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करनी चाहिए। भगवान की बात मानकर जब ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा की, तो इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलाधार वर्षा कर ब्रजभूमि को डूबो देने का प्रयास किया। बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठिा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर समस्त ब्रजवासियों को उसके नीचे आश्रय दिया और सात दिन तक निरंतर वर्षा से सभी की रक्षा की।