400 किसानों की आठ करोड़ धनराशि फंसी
- धान बेचने के बाद भुगतान के लिए परेशान हैं किसान
- विपणन विभाग ने बैंक को भेजी सूची
- अब गेहूं बेचने में भी होगी दिक्कत, बैंकों ने की है लापरवाही
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धान बेचने के बाद जिले के 400 से अधिक किसान भुगतान के लिए परेशान हैं। इनका आठ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। बैंक और विभाग का चक्कर काटकर किसान थक गए हैं। अब गेहूं बेचने का वक्त आ गया है, ऐसे में अगर धान का भुगतान नहीं हुआ तो गेहूं बेचने में किसानों को परेशानी होगी। लेकिन जिम्मेदार किसानों की समस्या से अनजान हैं।
किसानों को अपनी उपज का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए सरकार फसल खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बना रही है। ई-व्यवस्था पर बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें धान खरीद में भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा रहा है। जिले में बड़े रकबे पर धान की खेती हुई थी। जिले को 88 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया गया था। एक दिसंबर से 28 फरवरी तक धान खरीद की तिथि निर्धारित थी। धान बेचने के बाद किसानों को 72 घंटे में भुगतान मिलने का नियम है, लेकिन इसके बावजूद किसान धान बेचने के बाद भी भुगतान के लिए परेशान हैं। धान बेचने के दो माह बाद भी उन्हें धनराशि नहीं मिली। ऐसे जिले में एक या दो किसान नहीं हैं। बल्कि इनकी संख्या 400 से अधिक है। धनराशि लाख नहीं करोड़ में है। लगभग आठ करोड़ रुपये बकाया है। ऐसे में किसान विभाग का चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी को फोन कर रहे हैं। वहीं, विभागीय जिम्मेदारों का कहना है कि उनके द्वारा बैंक को ऐसे किसानों की सूची दे दी गई, जिनका भुगतान नहीं हुआ। उसमें जिस बैंक शाखा में किसान का खाता होगा, वहां शाखा प्रबंधक द्वारा किसानों को एनपीसीआई आधार से अंगूठा लगाना है। जो मिनटों का कार्य है। धान बेचने वाले किसान रामबरन पिकया, घनश्याम और प्रभु दयाल ने कहा कि सरकार का नियम है कि 72 घंटे मेें उपज बेचने पर धनराशि खाते में आ जाएगी। लेकिन दो माह से अधिक हो गया, अभी रुपये नहीं मिले। विभागीय अधिकारी से बात करते हैं तो वह बताते हैं कि बैंक से फंसा है। वहां जाते हैं तो कोई सुनता ही नहीं है। अब गेहूं की कटाई का समय गया है। धान का रुपया मिला ही नहीं, गेहूं कैसे बेचेंगे। समझ में नहीं आ रहा है। इनके जैसे अनेक किसानों की यही पीड़ा है।
---
बोले जिम्मेदार
जिले में 400 से अधिक किसानों के धान की धनराशि का भुगतान नहीं हुआ है, यह जानकारी है। हम सूची बनाकर लीड बैंक मैनेजर के पास भेज रहे हैं। वहां पर उन्हीं के द्वारा शाखा प्रबंधक के जरिए एनपीआरसी के माध्यम से किसानों का अंगूठा लगवाना है। इसके बाद धनराशि उनके खाते में पहुंच जाएगी। इस संबंध में लगातार हमारी ओर से बैंक से वार्ता की जा रही है।
अजय प्रताप सिंह जिला विपणन अधिकारी सिद्धार्थनगर
---
बोले जिम्मेदार
किसानों के धान बिक्रय की धनराशि के बकाये के संबंध में हमारे पास भुगतान से जुड़ा कोई कागजात नहीं आया है। पता करवाते हैं, जल्द ही संबंधित बैंक से वार्ता कर किसानों की समस्या का समाधान कराया जाएगा।
ओमप्रकाश अग्रहरि चीफ मैनेजर एसबीआई