संवाद न्यूज एजेंसी
भवानीगंज। डुमरियागंज क्षेत्र के अंदुआ शनिचरा गांव में चल रहे संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार की रात कनकेश्वरी देवी ने रुक्मिणी विवाह और कंस वध की कथा सुनाई। कथा को प्रारंभ करते हुए कनकेश्वरी देवी ने बताया कि कंस के अत्याचार से पृथ्वी त्राह-त्राह जब करने लगी, तब लोग भगवान से गुहार लगाने लगे। तब कृष्ण अवतरित हुए।
कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है, इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया, लेकिन हर प्रयास भगवान के सामने असफल साबित होता रहा। 11 वर्ष की अल्प आयु में कंस ने अपने प्रमुख अक्रूर के द्वारा मल्ल युद्ध के बहाने कृष्ण, बलराम को मथुरा बुलवाकर शक्तिशाली योद्धा और पागल हाथियों से कुचलवाकर मारने का प्रयास किया, लेकिन वह सभी श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों मारे गए। अंत में श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिला दी।
वहीं, कथा के दौरान श्रीकृष्ण रुक्मिणी के विवाह का वर्णन करते हुए कथावाचिका ने बताया कि विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी मन ही मन श्रीकृष्ण को बहुत चाहती थी, परंतु रुक्मिणी के पिता और भाई श्रीकृष्ण से जलते थे। इसलिए उन्होंने रुक्मिणी का रिश्ता शिशुपाल से तय कर दिया। जब रुक्मिणी को इस बात का पता लगा तो उसने श्रीकृष्ण के पास पत्र भेजकर उसका अपहरण करने के लिए कहा। संदेश पाकर श्रीकृष्ण ने ऐसा ही किया और वे रुक्मिणी का हरण करके ले गए। कथा के दौरान पंडाल में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
इस दौरान कुलदीप पांडेय, पप्पू पांडेय, गुरुदेव बाबा, जवाहिर, सुरेश यादव, जंग बहादुर, रामपाल आजाद, नीरज पांडेय आदि मौजूद रहे।