हर गांव का तैयार होगा डिजिटल खाका
सोशल मैपिंग से चिह्नित किए जाएंगे कुएं, नाली, तालाब, कंपोस्ट पिट और बायोगैस प्लांट
गांव के सामाजिक, आर्थिक स्थिति और भौतिक संसाधनों का तैयार हो रहा रिकॉर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिला पंचायतराज विभाग की ओर से स्वच्छता की वर्तमान वास्तविकता को जानने के लिए सर्वे किया जाएगा। सोशल मैपिंग के जरिए गांव का खाका तैयार किया जाएगा। ब्लॉक स्तर पर गठित टीम गांव-गांव जाकर कुआं, नाली, तालाब, सामुदायिक शौचालय, कंपोस्ट पिट और बायो गैस प्लांट की रिपोर्ट तैयार करेगी।
इसके पीछे शासन की मंशा है कि गांव विकास की हकीकत की जानकारी हो सके। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की ओर से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए तमाम कार्य किए जा रहे हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से गांव के परिसंपत्तियों की जानकारी एकत्र करने के लिए बेसलाइन सर्वे शुरू किया जा रहा है। अभियान चलाकर ब्लॉक स्तर पर गठित टीम गांव के विकास की हकीकत जानेगी। टीम के सदस्य सोशल मैपिंग के जरिए कुंआ, नाली, तालाब, सामुदायिक शौचालय, कंपोस्ट पिट, सामुदायिक व्यक्तिगत स्तर पर सोक पिट, लीच पिट, बायोगैस प्लांट आदि की जांच करेंगे। किस गांव में इनकी कितनी संख्या है और उपयोग कितना हो रहा है इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट विभाग एप पर अपडेट करेंगे। परिसंपत्तियों की जियो टैगिंग भी की जाएगी। डीपीआरओ आदर्श कुमार ने बताया कि शासन की ओर से पत्र मिला है। उनके निर्देशानुसार बेसलाइन सर्वेक्षण कार्य कराया जाएगा।
ब्लॉक स्तर पर काम करेगी 10-15 टीमें
ब्लॉक स्तर पर गठित टीम में 50 सदस्यों की संख्या रहेगी। एक ब्लॉक में 10-15 टीमें काम करेंगी। बेसलाइन सर्वेक्षण कार्य स्वच्छताग्राहियों के जरिए किया जाएगा। इसमें ब्लॉक स्तरीय जिम्मेदार शामिल होंगे। साथ ही विभागीय जिम्मेदार सर्वेक्षण कार्य की प्रगति के बारे में जानकारी लेते रहेंगे। सर्वे करने वाली टीम के सदस्यों को शासन की ओर से तय की दैनिक राशि का भुगतान किया जाएगा।