सिद्धार्थनगर। बीईओ बांसी के गिरफ्तारी के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रद्धा भारतीया की अदालत ने कानून के प्रावधानों का अनुपालन न करने को लेकर पुलिस पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही कोर्ट ने डीएम को जांच अधिकारी नामित करते हुए चार दिसंबर को अगली सुनवाई पर रिपोर्ट देने को कहा है। बता दें कि बांसी के सीओ और कोतवाल के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए डीएम पहले ही एसपी को पत्र लिख चुके हैं।
बीआरसी बांसी से बच्चों की किताबें बेचे जाने के मामले में बीते 15 अक्तूबर को चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने एसआई रमाकांत यादव की तहरीर पर केस दर्ज कर विवेचना शुरू की थी। जांच में बीईओ अखिलेश कुमार सिंह का नाम सामने आया जिसके बाद 29 नवंबर को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को पुलिस ने बीईओ को कोर्ट में पेश किया और रिमांड की अर्जी दी। बीईओ के वकील ने पुलिस पर विधि विरुद्ध गिरफ्तारी का आरोप लगाते हुए रिमांड का विरोध किया।
पुलिस ने पहले आपराधिक न्यास भंग बीएनस 316(5) और चोरी की वस्तुओं की बरामदगी धारा 317(2) के तहत रिमांड की अर्जी पेश की। इस पर कोर्ट ने बीईओ के पास से कोई बरामदगी नहीं होने कहा हवाला देते हुए अर्जी खारिज कर दी। इस पर थानाध्यक्ष रामकृपाल शुक्ल ने धारा-316(5) बीएनएस के तहत रिमांड मंजूर करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने चार दिन का रिमांड मंजूर किया और डीएम को आदेश दिया है कि मामले की जांच करके चार दिसंबर को अगली सुनवाई पर रिपोर्ट दें।
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पुलिस को डीएम को देनी चाहिए थी गिरफ्तारी की सूचना
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-59 में व्यवस्था है कि पुलिस थानों के भारसाधक अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट को अपने थानाक्षेत्र की सीमाओं से बिना वारंट गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्तियों के मामलों की रिपोर्ट करेंगे, चाहे उन व्यक्तियों की जमानत ले ली गई हो या नहीं। कोर्ट ने पूछा कि क्या बीईओ के मामले में इसका पालन हुआ। इस पर थाना प्रभारी रामृकपाल शुक्ला ने बताया कि गिरफ्तारी की सूचना डीएम को नहीं दी गई थी।
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दरोगा जवाब नहीं दे सके तब पेश हुए थानाध्यक्ष
कोर्ट में दरोगा रामनरायन दुबे और अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि विवेचक रामकृपाल शुक्ल अस्पताल में भर्ती हैं इसलिए कोर्ट आने में असमर्थ हैं। जब कोर्ट ने पूछा कि क्या थानाध्यक्ष बांसी रामकृपाल अवकाश पर हैं और अस्पताल में भर्ती हैं तो जवाब मिला कि वह अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन छुट्टी पर नहीं हैं। बाद में पूछताछ में प्रश्नों के उत्तर न देने पाने पर थानाध्यक्ष को कोर्ट में बुला लिया। थानाध्यक्ष ने कोर्ट में अस्पताल में भर्ती होना और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर छुट्टी न लेना स्वीकार किया। कोर्ट ने इसे संदेहास्पद मानते हुए सवाल उठाया कि ऐसा कैसे संभव है कि सरकारी कर्मचारी अस्पताल में भर्ती भी रहे और अवकाश भी न ले?
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प्रकरण से जुड़ाव न होने पर भी दरोगा की मौजूदगी पर आपत्ति
न्यायालय ने इस पर भी आपत्ति जताई कि दरोगा अनिल कुमार त्रिपाठी सरकारी सेवक हैं, जिनका संबंध बीईओ प्रकरण से नहीं है, इसके बाद भी वह इस मामले में दोपहर 12 बजे से शाम पांच बजे तक कोर्ट में उपस्थित रहे। कोर्ट ने कहा कि इस बीच उनके द्वारा किए जाने वाले अन्य सरकारी कार्य बाधित हुए और उनका कृत्य वर्तमान प्रकरण के संबंध में अत्यधिक रुचि दिखाता है।
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न्यायालय के आदेश के अनुसार बीईओ प्रकरण की जांच की जा रही है। अगली सुनवाई पर कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश की जाएगी।
- डॉ. राजा गणपति आर, जिलाधिकारी