नेपाल में नहीं देना पड़ता है किसी प्रकार का टैक्स, भारतीय कारोबारी हो जाते हैं सक्रिय
एक हजार रुपये से अधिक के कपड़े पर लगता है टैक्स
दशहरा और दीपावली में कपड़े खरीदने का नेपाल में है चलन, इसलिए खपा देते हैं कपड़े
15 दिन के अंदर कई बार पकड़ा गया बड़े पैमाने पर कपड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ठंड बढ़ने के साथ बाॅर्डर पर कपड़े की तस्करी बढ़ गई है। भारतीय कपड़ों की खेप नेपाल पहुंच रही है। इसमें कारोबारी से लेकर कैरियर तक शामिल हैं। दशहरा और दीपावली को देखते हुए तस्कर बड़ी मात्रा में कपड़ा बाॅर्डर पार करके मोटी कमाई कर रहे हैं।
नेपाल से जुड़े लोगों के मुताबिक, दोनों पर्वों में नेपाल में नया कपड़ा पहनने की मान्यता है। इसलिए हर व्यक्ति अपनी क्षमता के हिसाब से कपड़ा खरीदता है। नेपाल में जीएसटी जैसा कोई टैक्स देना नहीं है। औसतन एक कपड़ा, जिसकी कीमत एक हजार से ऊपर है, उस पर 225 रुपये जीएसटी लगता है।
टैक्स से बचने और मुंहमांगी कीमत पाने के लिए तस्कर कपड़ा नेपाल पहुंचा रहे हैं। लुधियाना, दिल्ली और बरदहिया बाजार का माल पहुंचा रहे हैं। नेपाल सीमा पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई यह साबित कर रही है कि बड़े पैमाने पर कपड़ा नेपाल जा रहा है। इससे जहां राजस्व की क्षति हो रही है, वहीं, सीमा पर आपराधिक गतिविधि वाले मजबूत हो रहे हैं।
जिले से लगने वाली भारत-नेपाल की 68 किलोमीटर सीमा पर देशविरोधी गतिविधियों के सक्रिय रहने के साथ तस्कर देश को आर्थिक चोट पहुंचा रहे हैं। तस्कर मौसम का मिजाज और डिमांड के हिसाब से सामान की तस्करी करते हैं। मौजूदा समय में बाॅर्डर पर कपड़े की तस्करी बढ़ गई है। कपड़े की तस्करी में जीएसटी का बड़ा खेल है। इसलिए तस्कर कपड़े को नेपाल पहुंचाकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
एक सप्ताह के भीतर मुख्य बाॅर्डर से कपड़े की बड़ी खेप पकड़ी गई। जबकि पगडंडी से कितना कपड़ा हर दिन नेपाल पहुंच रहा है। इसका किसी को अनुमान नहीं है। नेपाल के कारोबारी के मुताबिक, भारतीय कारोबारी ऐसे स्थान से थोक कपड़ा लेते हैं, जहां पर जीएसटी जैसा टैक्स की बचत रहती है। उस कपड़े को दुकान पर यहां पर बेचने पर टैक्स देना पड़ता है। उस टैक्स से बचने के लिए नेपाल पहुंचा देते हैं। इससे उनका टैक्स बच जाता है। वहीं, दूसरी ओर नेपाल में मुंहमांगी कीमत मिलती है।
कारण यह कि नेपाल मेंं भारतीय कपड़ों की अधिक मांग है। महिलाओं को सूट, सहित अन्य कपड़े अधिक पसंद आते हैं। इसलिए तस्कर इस त्योहारी सीजन में कपड़े की तस्करी कर रहे हैं। लाखों के टैक्स का खेल करके तस्कर राजस्व को क्षति पहुंचा रहे हैं।
दो लाख रुपये से अधिक का कपड़ा पकड़ा
10 अक्तूबर की रात खुनुवां चौकी की पुलिस ने हदियहवा बाग में रखा छह गट्ठर कपड़ा पकड़ा। इसमें साड़ी, सूट और शॉल बरामद हुई थी। इसकी अनुमानित कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपये थी। अगर ये कपड़े बाॅर्डर पार पहुंच जाते हैं तो लगभग 15 हजार रुपये टैक्स बच जाता है। साथ ही डेढ़ गुनी कीमत मिलती है। यानी एक बार में तस्करों को 30 से 40 हजार रुपये मिल जा रहा है।
बड़ी मात्रा में पकड़ा कपड़ा
आठ अक्तूबर को अलीगढ़वा बाॅर्डर से एसएसबी के जवानों ने बड़ी मात्रा में टी-शर्ट और अन्य कपड़ा पकड़ा था। आरोपी बरामद किए गए कपड़े के संंबंध में खरीद से जुड़े कोई कागजात नहीं दिखा सके। इसलिए कस्टम एक्ट के तहत कार्रवाई करके चालान कर दिया गया था।
लुधियाना और खलीलाबाद से अधिक ला रहे माल
सूत्रों के मुताबिक, नेपाल कपड़ा ले जाने वाले तस्कर कुछ दुकानें चुने हुए हैं। जहां पर खरीद से जुड़ा बिल तो रहता है, लेकिन फर्जी। माल कहीं रास्ते में कोई पकड़े तो दिखाने के लिए रहता है। टैक्स के नाम पर थोक देने वाला कुछ नहीं लेता है। खुद भी चोरी करता है। बाॅर्डर पर पकड़े जाने वाले अधिकांश कपड़े लुधियाना से आ रहे हैं।
इनमें शॉल, महिलाओं का ऊनी सूट आदि शामिल हैं। जबकि टी-शर्ट, शर्ट और बच्चों के कपड़े संतकबीनगर जिले के बरदहिया बाजार से आ रहे हैं। ऐसा पकड़े गए लोगों से पूछताछ में सामने आ चुका है। यानी यहां भी टैक्स चोरी का खेल चल रहा है।
बोले अधिकारी
सीमा पर एसएसबी के जवान पूरी तरह अलर्ट हैं। नियमित चेकिंग की जा रही है। अवैध रूप से नेपाल में घुसने की कोशिश करने वालों पकड़ा जा रहा है। सामान बरामद करने के साथ ही कार्रवाई की जा रही है।
-शक्ति सिंह, कमांडिंग अधिकारी, एसएसबी 43वीं वाहिनी सिद्धार्थनगर