मास्क पहनकर मनाएं दिवाली, सेहत रहेगी अच्छी
सिद्धार्थनगर। दीपावली के त्योहार में आतिशबाजी होनी है। हालांकि पटाखों के जलाए जाने से कुछ लोगों को परेशानी
भी हो सकती है। कोरोना संक्रमण काल में जो लोग संक्रमित हुए थे, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। डॉक्टरों का सुझाव है कि पटाखे जलने के दौरान लोगों को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए, इससे सेहत पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
दीपावली में तेज आवाज के पटाखे और धुआं से कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों की तकलीफ बढ़ सकती है, इस लिए सेहत को देखते हुए सतर्क रहने की आवश्यकता है। डॉक्टरों के अनुसार, वायु और ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लोगों को दूर रहकर पटाखे जलाने चाहिए, ताकि झुलसने और आंख में चिंगारी जाने से शरीर को कष्ट पहुंचने की नौबत न आए।
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में लोगों को मास्क लगाने की आदत पड़ गई है। दीपावली के दिन अनिवार्य रूप से मास्क लगाना चाहिए। इससे पटाखे के धुआं का नुकसान कम होगा, जबकि कोरोना संक्रमण का जोखिम भी कम हो जाएगा। दीपावली में दूसरे शहरों के लोग भी अपने घर आए होंगे। ऐसे लोगों से स्नेह और मिलने के के साथ सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
सांस लेने में हो सकती है तकलीफ
संयुक्त जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि फेफड़े के मरीजों के लिए धुआं 17 प्रतिशत नुकसान दायक है। मरीजों और कोरोना काल में संक्रमित हुए लोगों को पटाखे जलने के स्थान से दूर रहना चाहिए। धुआं के बीच में रहने से सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। हृदय रोग के मरीजों के लिए भी पटाखा हानिकारक है।
ज्यादा आवाज है नुकसान दायक
संयुक्त जिला चिकित्सालय के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एके झा ने बताया कि तेज आवाज से कान की नस क्षतिग्रस्त हो सकती है। इससे बहरापन का जोखिम रहता है। पटाखे के दुष्प्रभाव से दीपावली के बाद सनसनाहट और घबराहट की दिक्कत हो सकती है। कुछ लोगों को उल्टी, मितली भी आने लगती है। 120 डेसीबल आवाज सामान्य होती है, जबकि 180 डेसीबल से अधिक की आवाज सुनने के दौरान कान के पर्दा पर खराब प्रभाव पड़ता है।