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अस्पतालों के पर्ची काउंटर पर लगेंगे सीसी कैमरे

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अस्पतालों के पर्ची काउंटर पर लगेंगे सीसी कैमरे
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सिद्धार्थनगर। जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाएं जल्द ही बदली-बदली नजर आएंगी। अस्पताल में खराब पड़ीं जांच मशीनें दुरुस्त होंगी। पर्ची काउंटर के पास सीसी कैमरा लगाया जाएगा। इससे अस्पताल की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलगी। साथ ही अस्पतालों में सुधार के संबंध में नौ बिंदुओं पर कार्य करके रिपोर्ट देने के लिए शासन ने निर्देश दिया है।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और जरूरतमंदों के समय से के लिए प्रयासरत है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण मरीजों को अस्पताल में सुविधाएं नहीं मिल रहीं है। सूबे के डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक के अस्पताल के निरीक्षण में कई जगह खामियां पाई गई थीं। उसको संज्ञान में लेकर व्यवस्थाओं में सुधार की कवायद शुरू की गई है।
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अस्पताल में बदहाल व्यवस्था सुधारने के अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद ने पत्र जारी करते हुए जल्द से जल्द व्यवस्थाओं ने सुधार का निर्देश दिया है। इसमें जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी शामिल है। नई व्यवस्था के तहत पर्ची काउंटर और मुख्य स्थानों पर सीसी कैमरा लगाते हुए राज्य मुख्यालय से जोडने के लिए कहा है, जिससे अस्पताल की गतिविधियों पर मुख्यालय से मॉनिटरिंग की जा सके। इसके अलावा अन्य दिशा-निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि अगर इस पर काम हो जाएगा को अस्पताल में सुधार होगा, जिससे मरीजों को लाभ मिलेगा। इस संबंध में डिप्टी सीएमओ ने डॉ. सौरभ चतुर्वेदी ने बताया कि शासन से मिले निर्देशों को पालन कराते हुए व्यवस्था को और बेहतर बनाए जाएगा।
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सीएचसी-पीएचसी में भी लगेगी डॉक्टरों की नेम प्लेट
जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी पर पेयजल की व्यवस्था की जाए। यहां वॉटर कूलर आदि लगाए जाएं। अस्पतालों में साफ-सफाई अच्छी की जाए। जो एनक्यूएस का प्रमाणीकरण नहीं हुआ है, उसे प्रमाणित किया जाए। ओपीडी पर्ची काउंटर और दवा वितरण काउंटर पर सीसी कैमरा लगाया जाए। अस्पतालों में जांच के लिए लगी मशीनों को दुरुस्त किया जाए। खराब पड़ी मशीन को दुरुस्त कर उनका उपयोग किया जाए। सीएचसी और पीएचसी पर तैनात चिकित्सकों का नाम नोटिस बोर्ड पर लिखा जाए। जिला अस्पताल में अगर जनऔषधि केंद्र शुरू नहीं है तो उसे शुरू किया जाए। अगर चलता था और बंद है तो उसे सक्रिय किया जाए। कोई भी चिकित्सक बाहर की दवा न लिखे। मरीज को अंदर की ही दवा दें।
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