नालियां क्षतिग्रस्त होने से सड़क पर फैलता है गंदा पानी
: नए शहरी क्षेत्र थरौली, भीमापार, परसाशाह आलम व पोखरभिटवा का हाल
: डेढ़ वर्ष से बंद हुए ग्राम पंचायत के कार्य, नगर पालिका से भी विकास है ठप
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर के आसपास के जो गांव डेढ़ वर्ष पूर्व नगर पालिका में शामिल हुई उनमें ग्राम पंचायतों के कार्य बंद ही हुए नगर निकाय से भी विकास कार्य ठप है। जिससे थरौली, भीमापार, परसाशाह आलम, पोखरभिटवा आदि में क्षतिग्रस्त एवं चोक नालियों के कारण जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। कहीं-कहीं सड़कों पर पसरे नालियों के गंदे पानी के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
शहर के थरौली मोहल्ले में वन विभाग कॉलोनी, नवीन मंडी रोड पर जलनिकासी के लिए बनी नालियां टूटकर ध्वस्त हो चुकी है। हालत यह है कि गंदगी से चोक हो चुकी नालियां के कारण नवीन मंडी के पास सड़क टूटकर नाली में बदल गयी है और प्रतिदिन पैदल, बाइक सवार एवं बड़े वाहन इसी टूटी सड़क में बह रही नाली के बीच से गुजरने को मजबूर है। यही हाल थरौली प्राथमिक विद्यालय के पीछे स्थित मोहल्ले में जलनिकासी के लिए नाली नहीं बनने से बारिश के मौसम में लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। अब भीमापार का हाल जाने यहां पर नाली निर्माण नहीं होने से रास्ते ही नाले में बदल जाते है। शहर की नया हिस्सा बने गोबरहवा मोहल्ले में भी जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त न होने स्थिति बदहाल है। थरौली निवासी गुड्डू शुक्ल का कहना है कि जलनिकासी का इंतजाम नहीं होने से बहुत दिक्कत होती है। यहीं के पिंटू पाठक कहते है कि क्षतिग्रस्त व सफाई न होने से नालियां चोक हो जाती है, जिससे गंदा पानी सड़क पर बहने लगता है। राजकुमार का कहना है कि हल्की सी बारिश में नाली का पानी सड़क पर पसरने लगता है, जिससे घर से निकलने में सांसत झेलनी पड़ती है। लालजी दुबे का कहना है कि नयी नालियों के निर्माण एवं क्षतिग्रस्त नालियों के मरम्मत के प्रति जिम्मेदारों के उदासीन रवैये नगर पालिका में नए शामिल मोहल्लों में जलनिकासी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। प्रभारी ईओ एवं एसडीएम नौगढ़ विकास कश्यप का कहना है कि शहर में नए शामिल हुए हिस्से में सड़कों के पुनरोद्धार एवं जलनिकासी की व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए कार्ययोजना बनायी जा रही है, जल्द ही जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी।
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बारिश में तालाब बन जाता है वन विभाग परिसर
जलनिकासी व्यवस्था नहीं होने से बारिश होते ही वन विभाग परिसर तालाब में बदल जाता है, यहां तक कि अगर पंपसेट लगाकर पानी नहीं निकाला जाए तो वन विभाग कार्यालय एवं आवासीय भवन भी पानी में डूबे रहेंगे। जैसे ही बारिश का समय आता है वन विभाग परिसर से पानी निकालने के लिए लगातार पंपसेट चलाया जाता है। वन विभाग अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को कार्यालय परिसर के उच्चीकरण एवं जलनिकासी के प्रस्ताव भेजा है जो वर्षों से शासन में लंबित है।