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Siddharthnagar News: निलंबन के बाद कर दिया 11.84 करोड़ का भुगतान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। जिले में चर्चित धान खरीद घोटाले की जांच का दायरा बढ़ा तो कई अन्य अधिकारी भी लपेटे में आ सकते हैं। एसआईटी (पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) वर्तमान में पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक अमित कुमार चौधरी व सहायक गणक उमानंद उपाध्याय के धान-गेहूं खरीद खाते से गलत भुगतान की जांच कर रही है।
हालांकि यह दोनों अधिकारियों ने अपने निलंबन के बाद भी पीसीएफ के खाते से 15 लोगों को 11.84 करोड़ रुपये भुगतान किया था।
ऐसे में सवाल उठता है कि बिना विभाग के अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के निलंबन के बाद भी इनके द्वारा विभागीय खाते से निजी खातों में भुगतान करना संभव नहीं था।
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जिले में धान गेहूं खरीद घोटाले में अब तक 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हो चुका है। इसकी जांच एसआईटी कर रही है। जांच के दायरे में पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक व सहायक गणक के पीसीएफ के धान-गेहूं खरीद खाते से कई लोगों को गलत भुगतान करना शामिल है।
धान-गेहूं खरीद खाते के बैंक स्टेटमेंट के अनुसार कई लोगों के नाम सामने आए हैं। मामले में अभी कई विभागीय अधिकारी जांच के दायरे आ सकते है। कारण यह है कि पीसीएफ के लखनऊ स्थित मुख्यालय के आदेश पर 17 अगस्त 2024 को पीसीएफ के तत्कालीन जिला प्रबंधक अमित कुमार चौधरी व सहायक गणक उमानंद उपाध्याय को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी इनके द्वारा पीसीएफ के गेहूं खरीद खाते से 15 लोगों को 11.84 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान कर दिया गया। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि निलंबन के बाद भी इनके द्वारा कैसे विभागीय खाते का उपयोग किया जा सका। ऐसा बिना विभाग के अन्य अधिकारियों के मिलीभगत के संभव ही नहीं है।
अधिवक्ता अनिरुद्ध कुमार यादव का कहना है कि जांच के दायरे में दोषी पाए गए छोटे से बड़े सभी अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
26 दिन बाद नए जिला प्रबंधक को मिला कार्यभार पीसीएफ मुख्यालय के आदेश पर अनियमितता के मामले में 17 अगस्त 2024 को तत्कालीन जिला प्रबंधक पीसीएफ अमित कुमार चौधरी व सहायक गणक उमानंद उपाध्याय को निलंबित कर दिया गया था।
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इसके 26 दिन बाद नए जिला प्रबंधक ने 13 सितंबर 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था। इस बीच उक्त दोनों अधिकारी द्वारा 15 लोगों के खाते में गलत तरीके से 11.84 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान कर दिया गया। ऐसे में विभाग के उच्चाधिकारी एवं स्थानीय अधिकारियों पर सवाल उठना तय है कि इनके निलंबन के बाद संबंधित खाता संचालन पर नियंत्रण के संबंध में आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गयी। लोगों में चर्चा है कि कहीं इनके गलत भुगतान से अन्य लोगों को भी लाभ तो नहीं पहुंचाया गया।
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