डुमरियागंज के ग्राम लोहटा में जमीन को चकबंदी के बाद कर दिया गया था बंजर आरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
इटवा। ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए प्रदेश के मुखिया जहां बुलडोजर चलवा रहे हैं। वहीं सरकार की मंशा पर उन्हीं के जिम्मेदार अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं। इन जमीनों पर तहसील प्रशासन जहां कार्यवाही कर रहा है। वहीं चकबंदी विभाग से जुड़े कुछ अधिकारी बंजर भूमि को आबादी में बदलने की जुगत में लगे हुए हैं।
ताजा मामला डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के ग्राम लोहटा का है। यहां लगभग 1960 के दशक के समय हुई चकबंदी में बने गाटा संख्या 180/123 एअर भूमि बंजर के लिए आरक्षित की गई थी। उस समय शौचालय के अभाव में शौच क्रिया करती थे। पुनः 1990 के बाद गांव में चकबंदी प्रक्रिया पुनः प्रारंभ हुई। चकबंदी विभाग ने इस गाटे को नया नंबर 402 बनाते हुए इसे पुनः बंजर खाते में आरक्षित कर दिया। चकबंदी विभाग द्वारा धारा 52 का प्रकाशन हुए लगभग 15 वर्षो बाद कुछ लोगों की नजर इस जमीन पर पड़ी। तो वह इस कीमती भूमि पर कब्जा करने की जुगत में लग गए। पीडब्ल्यूडी रोड पर स्थित होने के चलते यह कब्जा राजस्व विभाग की नजर में आ गया। विभाग ने कब्जेदार को अवैध कब्जा हटाने व दस हजार रुपये जुर्माना अदा करने का आदेश कर दिया। परंतु अवैध कब्जा धारक इस कब्जे को छोड़ना नहीं चाह रहा था। वह गांव में हुए धारा 52 के प्रकाशन के लगभग 15 वर्षो बाद मालियत लगवाकर आबादी कराने की जुगत में लग गया। इसकी जानकारी होने पर गांव के संतोष कुमार ने डीएम सिद्धार्थनगर से मिलकर जांच की मांग की।
इस संबंध में डीएम पवन अग्रवाल ने सीओ चकबंदी डुमरियागंज को जांच करके शीघ्र रिपोर्ट प्रेषित करने के आदेश दिए हैं। इस सम्बन्ध में सीओ चकबंदी डुमरियागंज वर्मेश्वर उपाध्याय ने बताया कि अभी पत्र मुझे नहीं मिला है। मिलने पर जांचोपरांत रिपोर्ट दी जाएगी।