सिद्धार्थनगर। चौराहों और सड़कों पर महापुरुषों और किसी धर्म विशेष से जुड़ी प्रतिमाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिले के लोगाें की मिलीजुली प्रतिक्रिया है। कई लोग इसे बेहतर कदम बताते हैं तो कुछ लोग इन मूर्तियों को सड़क के किनारे लगाने की बात कहते हैं। इसके साथ ही नागरिकों के सड़कों पर आने-जाने के अधिकारों से वंचित न किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सराहनीय बताते हुए इसका अनुपालन कराए जाने की भी वकालत की गई है।
सराहनीय है यह फैसला : अग्रवाल
नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन एसपी अग्रवाल कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है, वह सराहनीय है। चौराहों पर मूर्तियों की स्थापना से सड़क सिकुड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत कोहरे के समय में होती है। चौराहों पर ऐसे में दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला काबिले तारीफ है। अब प्रशासन को चाहिए कि इस पर त्वरित कार्रवाई हो।
यातायात होता है प्रभावित : अनूप
सभासद अनूप यादव कहते हैं कि चौराहों पर मूर्तियां लगी होने के कारण यातायात प्रभावित होता है। इसके साथ ही जो मूर्तियां चौराहे से दूर होती हैं उसकी देखरेख भी नहीं हो पाती। वैसे हम महापुरुषों की यादें भी दूर नहीं कर सकते हैं। मूर्तियां लगें लेकिन उसकी एक नियत जगह बने। इन सबके बीच यातायात सही करने को लेकर भी नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए।
आदेश का कराएं पालन: शिवेंद्र
भीमापार रेलवे क्रासिंग के निकट के निवासी शिवेंद्र पांडेय कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश दिया है, उसका अनुपालन हर हाल में कराया जाना चाहिए। जब ऐसा हो जाएगा तो काफी हद तक दुर्घटनाओं से भी निजात मिलेगी। बांसी में कुछ माह पूर्व इसी कारण एक ट्रक दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। चौराहों पर मूर्ति स्थापना से प्रशासन और निकाय प्रशासन को बचना चाहिए।
सड़कों पर न लगाएं मूर्तियां: मुरली
शहर के सिविल लाइंस के व्यापारी मुरली धर अग्रहरि कहते हैं कि सड़कों पर तो मूर्ति लगानी ही नहीं चाहिए। इससे सड़क का एरिया घट जाता है। शहर के अंदर सिद्धार्थ तिराहा पर ऐसा ही है। यहां ढाला बंद होने पर जाम लग जाता है। इसके अलावा जब बस स्टेशन से बस आती है तब भी यही स्थिति बनती है। मूर्तियां लगें लेकिन उन्हें चिह्नित स्थान पर ही लगाया जाए।