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फ्लैक्स कम रहे हैं जिंदगी के दिन

Sun, 20 Jan 2013 05:30 AM IST
Siddhartha nagar
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सिद्धार्थनगर। फ्लैक्स से बने होर्डिंग और पोस्टर पॉलिथीन की तरह ही बहुत खतरनाक हैं। रंग-बिरंगे सजे ये होर्डिंग आज पूरे शहर में हैं। इससे होने वाली बीमारियों से आम आदमी अनजान है। यही वजह है कि पूरे शहर में इन होर्डिंग्स का बोलबाला है। छोटी-मोटी कंपनियाें समेत बड़ी कं पनियों तथा राजनैतिक पार्टियों और छात्रनेताओं के प्रचार-प्रसार वाले होर्डिंग्स के फ्लैक्स मानक के विपरीत होने की वजह से उन्हें नष्ट भी नहीं किया जा सकता है। सस्ते फ्लैक्स बोर्ड की कीमत 10 रुपये स्क्वायर फुट है। महंगे फ्लैक्स बोर्ड की कीमत 40 रुपये स्क्वायर फुट है। विशेषज्ञों की मानें तो इन फ्लैक्स बोर्डों में इस्तेमाल होने वाली पन्नी काफी मोटी होती है, जो कभी नष्ट नहीं होती है।
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महंगे फ्लैक्स बोर्ड का इस्तेमाल बड़ी कंपनियां ही करती हैं। इन फ्लैक्स बोर्डों में दो तरह की क्वालिटी होती है। इसमें विनाइल फ्लैक्स महंगे होते हैं। इनकी कीमत 40 से 60 रुपये स्क्वायर फुट होता है। साधारण फ्लैक्स 10 से 12 रुपये प्रति स्क्वायर फीट होते हैं। इनका इस्तेमाल राजनैतिक पार्टी के छोटे-छोटे पदाधिकारी और छात्र नेता करते हैं। सस्ता होने के कारण ये लोग महंगे फ्लैक्स के इस्तेमाल से बचते हैं। शहर के चौराहों समेत आसपास के तिराहों पर इन रंग-बिरंगे फ्लैक्सों का बोलबाला है। नगर पालिका के 11 जगहों पर अवैध रूप से बड़े फ्लैक्स बोर्ड के होर्डिंग मौजूदा समय में लगाए गए हैं। छोटे होर्डिंग्स की बात की जाए तो इनकी संख्या पांच सौ से अधिक होगी। स्थिति यह है कि इनमें ज्यादातर ऐसे लोगों के फ्लैक्स बोर्ड लगे हैं जिनको लोग जानते भी नहीं है। ऐसे में पर्यावरण तथा लोगों की सेहत का ख्याल इन होर्डिंग्स लगाने वालों को बिल्कुल नहीं है।
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष जमील सिद्दीकी का कहना है कि शहर में लगे जितने भी फ्लैैक्स बोर्ड के होर्डिंग्स लगाए लगाए गए हैं वे अवैध हैं। इनको जल्द से जल्द हटवा दिया जाएगा। शहर की खूबसूरती को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा।
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सेहत के लिए खतरनाक है फ्लैक्स
सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज के भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता एचएन मिश्रा का कहना है कि पॉलिथीन की तरह ही फ्लैक्स भी लोगों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक है। उनका मानना है कि जितना पॉलिथीन खतरनाक होता है उतना फ्लैक्स नहीं होता। कारण यह कि अच्छे फ्लैक्स में इस्तेमाल होने वाले पॉलिथीन मोटे होते हैं जो नष्ट हो जाते हैं। पतले फ्लैक्स कभी नष्ट नहीं होते।
फ्लैक्स हटे तो बढ़ जाए खूबसूरती
वरिष्ट महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. तमन्ना निजाम का कहना है कि पूरा शहर होर्डिंग्स से पटा हुआ है। यहां तक कि मेन चौराहाें पर, रेलवे क्रासिंग पर इन होर्डिंग्स को खूब बोलबाला है। जबकि नगर पालिका क्षेत्र में अवैध रूप से ये होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इसकी वजह से शहर की खूबसूरती बिगड़ गई है। अक्सर ये होर्डिंग्स दुर्घटना के कारण भी बनते रहते हैं।
इन होर्डिग्स का कोई मतलब नहीं
बार एसोसिएशन के पूर्व जिलाध्यक्ष विरेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि इन होर्डिंग्स का शहर में कोई मतलब नहीं बनता है। ऐसे में जिस चीज की शहर में जरूरत नहीं है उसको लगाने का कोई मतलब ही नहीं बनता है। जबकि ये सेहत के लिए सबसे खतरनाक भी हैं। नगर पालिका प्रशासन को इन होर्डिग्स को हटवा देना चाहिए। यह लोगों की सेहत के लिए ठीक होगा।
नेता, छात्रनेता करते हैं ज्यादा इस्तेमाल
वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर सिंह का कहना है कि ये होर्डिंग्स केवल राजनैतिक पार्टी तथा छात्र नेताओं तक सिमट कर रह गया है। इसका कोई मतलब नहीं बनता है। सरकार को चाहिए कि ऐसे होर्डिंग्स पर पॉलिथीन की तरह रोक लगा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन्हीं होर्डिंग्स की वजह से शहर की खूबरसूती बिगड़ रही है। साथ ही जाने-अन्जाने दुर्घटना भी डर रहता है।
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