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बाढ़ से तबाह हो गए 66 हजार किसान

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बाढ़ से तबाह हो गए 66 हजार किसान
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पांच तहसील क्षेत्र में बर्बाद हुई 35,514 हेक्टेयर धान की फसल
डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे पर होती है धान की खेत
किसानों को 15.95 लाख रुपये मुआवजा बांट चुका है प्रशासन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बाढ़ की त्रासदी 35,514 हेक्टेयर भूमि पर लगी धान की फसल को निगल गई। इस तबाही में 66 हजार से अधिक किसान प्रभावित हुए। जिले के पांचों तहसील के किसान बाढ़ की तबाही के शिकार हुए हैं। प्रशासन की ओर से किसानों को फसल क्षति का मुआवजा बैंक खाते के जरिए भेजा गया मगर इसमें भी शासन के मानक के आगे बड़ी जोत वाले किसानों को नुकसान की तुलना में मुआवजा नहीं मिला। हालांकि, समय से मुआवजा राशि मिलने से किसानों को सहूलियत जरूरी मिली।
नेपाल सीमा से सटे जनपद सिद्धार्थनगर की गिनती प्रदेश तराई क्षेत्र के जिलों में की जाती है। यहां का 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगता है। जिले 85 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। खेती से ही उनकी जीविका और व्यवस्था चलती है। मुख्य रूप से दो फसलें यहां पर उगाई जाती हैं। इसमें धान और गेहूं प्रमुख फसल में शामिल हैं। दो लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि कृषि योग्य है, जिस पर खेती होती है। इसमें गेहूं की फसल में किसानों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता है। मगर धान की खेती हर साल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। कारण जनपद नेपाल सीमा से सटा होने के कारण पहाड़ पर बारिश के बाद जिले में अगर कम बारिश हो तब भी बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। वहां से पानी छोड़े जाने के बाद नदियां उफान पर आती हैं और फसल समेट ले जाती हैं। शोहरतगढ़, नौगढ़, डुमरियागंज, इटवा और बांसी कमोबेश सभी तहसीलें बाढ़ से प्रभावित रही हैं। इस साल बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई हर साल की तुलना में इस वर्ष बाढ़ का पानी काफी दिनों तक भरा रहा, जिससे फसल अधिक प्रभावित हुई। इसमें डुमरियागंज तहसील में बाढ़ की तबाही कुछ अधिक थी, कारण राप्ती काफी समय तक उफान पर थी। तबाही से उबरे किसानों को शासन की ओर से मुआवजा दिया गया, लेकिन जो मानक बनाया गया, उसमें बड़ी जोत वाले किसानों को नुकसान की तुलना में लाभ नहीं मिल पाया। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव भरवठिया मुस्तहकम गांव निवासी किसान फिरोज मलिक, कठौतिया गांव निवासी किसान सत्यप्रकाश पांडेय, पेड़ारी निवासी नफीस और तेतरी निवासी किसान जफर ने कहा कि मुआवजा सरकार की ओर से किसानों को समय से सर्वे करके दिया गया। मगर दो हेक्टेयर सीमा तय कर देने से बड़े किसानों को लाभ नहीं मिला। नुकसान की तुलना में मुआवजा कम मिला, बड़े किसानों को अधिक नुकसान हुआ। इस संबंध में एडीएम उमाशंकर ने बताया कि बाढ़ प्रभावित किसानों को शासन तय निमय के तहत मुआवजा राशि बैंक खाते के माध्यम से वितरित की गई है।
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इतना रकबा हुआ बाढ़ से तबाह
आंकड़ों के मुताबिक शोहरतगढ़, नौगढ़, इटवा, डुमरियागंज, बांसी क्षेत्र में 35,514 हेक्टेयर फसल बाढ़ से नष्ट हुइ है। इसमें 66,340 किसान बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इसमें किसानों को 15,95,85,996 रुपये किसानों को मुआवजा दिया गया है।
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इतनी तय की गई है सीमा
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अधिकतम एक किसान को दो हेक्टेयर जोत का मुआवजा देना है। अगर किसी किसान का उसे अधिक प्रभावित हुआ है, तब भी उसे दो हेक्टेयर का ही लाभ मिलना है। उससे कम जोत वाले को रकबे के अनुसार मुआवजा दिया गया है। इसमें एक हेक्टेयर पर 13,500 रुपये मुआवजा राशि दी गई है।
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