सिद्धार्थनगर। नेपाल की खुली सीमा के रास्ते भारत में विदेशी नागरिकों के घुसने का पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार विदेशी नागरिक प्रतिबंधित क्षेत्र से भारतीय सीमा में घुसने की कोशिश कर चुके हैं। करीब छह माह पहले ही ककरहवा सीमा के पास एक विदेशी ने प्रवेश की कोशिश की थी। हालांकि तब एसएसबी ने उन्हें रोककर कागजात जांच कर वापस भेज दिया था। इस बार चीन के नागरिकों के बिना रोकटोक सीमा क्षेत्र में आने और वीडियो, फोटो बनाकर लौट जाने से खलबली मची हुई है। जिम्मेदार दूसरे दिन भी उनका डिटेल और यात्रा का मकसद खंगालने में जुटे रहे।
नेपाल में चीन की बढ़ती धमक लगातार बढ़ती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र में विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से चीन जड़ें मजबूत करने में जुटा हुआ है। यही कारण है कि अक्सर चीनी लोग सीमावर्ती क्षेत्र में घूमते रहते हैं। सुरक्षा एजेंसियां भी इससे इनकार नहीं करती। मगर अनधिकृत रूप से बार्डर पार कर आना और वीडियो, फोटो शूट कर वापस लौट जाने की घटना ने उनके कान खड़े कर दिए हैं। जिले की 68 किमी लंबी सीमा नेपाल से लगती है। तीन कस्टम चौकियां भी हैं। मगर किसी भी स्थान से भारत-नेपाल के अलावा तीसरे देश के नागरिक का प्रवेश नहीं हो सकता। वीजा, पासपोर्ट सहित सभी वैध दस्तावेज होने के बाद भी उन्हें केवल सोनौली के माध्यम से ही भारत में आने की अनुमति मिल सकती है। बार्डर पर तैनात सुरक्षा एजेंसी भले ही चीनी नागरिकों के नेपाल सीमा से ही लौटने की दलील दे रही हो, लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों चीनी नागरिक भारतीय सीमा के अंदर तक आए थे। 10 से 15 मिनट तक इस क्षेत्र में रुके भी रहे। इस दौरान रोक-टोक तो दूर देर शाम तक सुरक्षा बलों को इसकी भनक तक नहीं थी। मीडिया के स्तर पर मामला संज्ञान में लाने के बाद जिम्मेदार हरकत में आए। चीनी नागरिकों के पास भारतीय वीजा रहा भी हो तो अनधिकृत क्षेत्र से प्रवेश कर बार्डर की वीडियो और फोटो शूट करने से न रोकना और इसके समेत वापस जाने देना बड़ी चूक है। बहरहाल, एसएसबी के अधिकारी इस बाबत कुछ भी बोलने कतरा रहे हैं। हालांकि अपने स्तर से उन्होंने छानबीन शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो रविवार को नेपाल के प्रहरी कार्यालय से संपर्क कर चीनी नागरिकों का विवरण खंगालने की कोशिश होती रही।
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