ग्राम पंचायतों का चुनाव भले ही पूरा हो चुका हो, मगर नई पंचायत के
गठन की प्रक्रिया में पेंच फंस गया है। बढनी ब्लाक के करीब 20 ग्राम
पंचायतों का गठन फिलहाल संभव नहीं दिख रहा।
इन गांवों में इतने सदस्य नहीं
है कि पंचायत का गठन किया जाए। उपचुनाव तक पंचायत सदस्यों के पद भरने की
कोई उम्मीद भी नहीं है। ऐसे में गांव की नई सरकार का काम-काज प्रभावित होना
तय है। सदस्य पद रिक्त रहने से
परेशान ब्लाक अधिकार विकल्प तलाश रहे
हैं।
बढ़नी ब्लाक में कुल 77 ग्राम पंचायतें हैं। इसमें 911 ग्राम पंचायत सदस्य
के पद हैं। 179 पद नामांकन न होने के कारण खाली रह गए। खाली रहे पदों से वह
गांव सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, जिनमें निर्वाचित सदस्यों की संख्या दो
तिहाई से कम है। ऐसे गांवों की संख्या 20 है।
झुंगहवा में तेरह ग्राम
पंचायत सदस्य के पद हैं, लेकिन नामांकन न होने से तेरहों पद रिक्त हैं।
रेकहट के 13 में से 12 पद रिक्त हैं। रामनगर में 11 में 10 पद, खजुरिया
शर्की में 13 में 8, संसरी, अहिरौला, सेवरा में 11 में 9 पद रिक्त हैं।
पकड़िहवा में 11 में सात पद नामांकन न होने की दशा में खाली हैं।
अकरहरा,
मनिकौरा, गुलरी, झरुआ, लोहटी में 11 में 6 सदस्य पद रिक्त हैं। खैरी शीतल
प्रसाद में 13 में 6, गडऱखापरसा दीवान सिंहोरवा में 11 में 5, मानपुर में
11 में 4, अर्री में 13 में 5 पद रिक्त हैं।
ग्राम पंचायत सदस्यों की
संख्या दो तिहाई से कम होने के कारण पंचायतों व समितियों का गठन नहीं हो
सकेगा। इससे चलते प्रधानों को न तो शपथ ग्रहण कराया जाएगा और न ही उन्हें
किसी प्रकार के अधिकार प्राप्त होंगे।
इस संबन्ध में खंड विकास अधिकारी का
कहना है कि गांव में काम-काज प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासकीय रूप से
प्रधानों को जिम्मेदारी दी जाएगी। विकास का काम पंचायत समिति के गठन के बाद
ही हो सकेगा।