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बाढ़ग्रस्त कृषि भूमि का सर्वे आज से

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सिद्धार्थनगर। बाढ़ की त्रासदी झेल रहे किसानों की फसलों के सर्वे के लिए कृषि विभाग ने सात टीमों का गठन किया है। प्रत्येक टीम में राजस्व, कृषि और बीमा कंपनी के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। यह टीम मंगलवार से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बाढ़ग्रस्त कृषि भूमि का सर्वे कर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके आधार पर किसानों को क्षति की पूर्ति की जाएगी। हालांकि उन किसानों के हाथ कुछ खास नहीं आएगा, जिन्होंने बीमा कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।
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जिले में कुल 2.89 लाख किसान हैं। इनमें करीब 37 हजार किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं। केसीसी के माध्यम से बीमा योजना के दायरे में आए किसानों की पूरी फसल को बीमा कंपनी ने आच्छादित किया है। यानी फसल के नुकसान पर कंपनी उसकी क्षतिपूर्ति करेगी। अन्य किसानों ने बीमा कराने में कोई रुचि नहीं दिखाई थी, लिहाजा उनकी क्षति की पूर्ति शासन-प्रशासन की कृपा पर निर्भर है। बहरहाल, सर्वे के लिए विभाग ने पूरे जिले में सात टीमों का गठन कर दिया है। टीम में कृषि विभाग के अलावा राजस्व व बीमा कंपनी के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। यह टीम प्रत्येक गांव में जाकर बाढ़ से नष्ट फसल का सर्वे करेगी और उसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित करेगी।
जिला कृषि अधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह के मुताबिक जिन किसानों की 70 फीसदी से अधिक फसल क्षति हुई है, उन्हें मुआवजे की 25 प्रतिशत राशि एक माह के भीतर प्रदान कर दी जाएगी। बीमा युक्त किसानों को मुआवजे का वितरण फसल बीमा के स्वीकृत दर के अनुसार किया जाएगा, जबकि अन्य किसानों को शासन से अनुमोदित दर के अनुसार मुआवजा मिलेगा।
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फसल नुकसान का यह है अनुमोदित दर
बाढ़ से प्रभावित लोगों को सहायता राशि का वितरण वर्ष 2015-20 तक के लिए स्वीकृत राज्य आपदा मोचक निधि के मानकों के अनुरूप दिया जाएगा। इसके अनुसार कृषि व उद्यान की वार्षिक फसलों की क्षति के बदले असिंचित क्षेत्र के लिए 6800 रुपये और सिंचित क्षेत्र के लिए 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर रुपये निर्धारित है। किसी भी किसान को न्यूनतम एक हजार रुपये से कम की राशि नहीं दी जाएगी। यह मानक उन किसानों के लिए है, जिन्होंने बीमा नहीं कराया है। बीमा युक्त किसानों की क्षतिपूर्ति बीमा के अनुसार न दी जाएगी।
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