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संघ के ‘ए’ ‘बी’ ‘सी’ फार्मूले से बूथ जीतने की तैयारी..

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संघ के ‘ए’ ‘बी’ ‘सी’ फार्मूले से बूथ जीतने की तैयारी
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मतदान पर्ची के साथ सक्रिय होंगे संघ कार्यकर्ता
जिले के हर बूथों पर रखेंगे विशेष नजर
तीन कटेगरी में किया गया है वोटरों को विभाजित
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। मतदान की तिथि निकट आते ही राजनीतिक दल और उनके सहयोगी दल अपने-अपने बूथों पर सक्रिय हो चले हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने भी इसी कड़ी में पर्दे के पीछे रहकर भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव की कमान संभाल ली है। इसके लिए उसने ‘ए’ ‘बी’ ‘सी’ फार्मूला तैयार किया है, जो मतदाताओं को वरीयता के आधार पर बूथों तक पहुंचाने का काम करेंगे।
भाजपा के लिए माहौल बनाने और मतदाताओं को बूथों तक पहुंचाने के लिए संघ पूरी तरह से अंदरूनी तौर पर सक्रिय है। बुद्ध भूमि पर उसकी नजर है। यही वजह है कि इस बार संघ ने अंदरूनी तौर पर मतदाताओं की तीन कटेगरी तैयार की है। पहली कटेगरी ‘ए’ है, इस श्रेणी में उन मतदाताओं को रखा जा रहा है, जो पूरी तरह से भाजपा के समर्थक हैं। ‘बी’ श्रेणी में उन मतदाताओं को रखा गया है, जो भाजपा और दूसरे दलों के बीच उलझे हुए हैं। ‘सी’ की श्रेणी में उन मतदाताओं को रखा गया है, जो पूरी तरह से भाजपा के साथ नहीं हैं। इसके लिए संघ के सेवकों को लगाया गया है, जो रूठे हुए मतदाताओं से यह पूछ रहे हैं कि आखिर भाजपा ने गलती क्या की है और उसमें सुधार की क्या जरूरत है। इसके अलावा भाजपा के समर्थकों की भी मदद लेकर ऐसे मतदाताओं के पास जा रहे हैं, जो पूरी तरह से भाजपा से नाराज चल रहे हैं।
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संघ के एक नेता ने नाम न छपने की शर्त पर बताया कि अंदरूनी तौर पर भाजपा के लिए हर घर को टच किया जा रहा है। इसमें पढ़े-लिखे सवर्ण और पिछड़ी और दलितों पर खास फोकस है, जिससे कि जो मतदाता नाराज चल रहे हैं, उन्हें मनाया जा सके।

अधिवक्ता और चिकित्सकों पर नजर
संघ के स्वयं सेवक और कार्यकर्ता बूथ कमेटियों पर ऐसे लोगों के घरों पर दस्तक दे रहे हैं, जो ज्यादा पढ़े-लिखे हों, जिनकी क्षेत्र में ज्यादा पहचान हो। ऐसे लोगों में अधिवक्ता, चिकित्सक, इंजीनियर जैसे लोग शामिल हैं। इसके पीछे संघ का उद्देश्य है कि ये लोग समाज में ज्यादा असर डाल सकते हैं। इसके अलावा पिछड़ी और दलितों में पढ़े-लिखे लोगों और अधिकारियों के घरों पर भी संघ दस्तक दे रहा है।
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अल्पसंख्यकों का नहीं मिल रहा साथ
संघ के ए, बी, सी फार्मूले में अल्पसंख्यकों का साथ नहीं फिट बैठ रहा है। ऐसे में संघ को अल्पसंख्यकों से दूरी बनानी पड़ रही है। हालांकि जिले में शिया समुदाय में थोड़ी बहुत पकड़ संघ है, जिसकी बदौलत वह अल्पसंख्यकों में कुछ हद तक वोट की सेंधमारी कर सकते हैं।
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