फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम होने के बाद निकला टेंडर

Sun, 14 Oct 2018 10:32 PM IST
siddharthnagar
विज्ञापन
पौधरोपण के बाद लगाए गए ट्री गार्ड - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका सिद्धार्थनगर द्वारा हाल ही निकाला गया टेंडर विवादों में घिर गया है। पालिका के कई सभासदों ने आरोप लगाया है कि जिन कार्यों के लिए यह टेंडर निकला है वह पहले ही पूर्ण हो चुके हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से सभासदों ने इसकी शिकायत सीएम और सांसद से की है। इसे लेकर 23 अक्तूबर से सभासद आमरण अनशन पर बैठेंगे। डीएम से मिलकर भी पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन


विजय नगर के सभासद बृजेश पासवान, पूरब पड़ाव के अमित सिंह, सरोजनी नगर की गिरिजा पति, शास्त्री नगर की पार्वती देवी आदि सभासदों ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका सिद्धार्थनगर में एक करोड़ से अधिक का काम कराने के बाद टेंडर निकाला गया है। यह नियम के विपरीत है। इन कामों में पुरानी नौगढ़ के बम-बम मंदिर के पास पोखरे के बगल में मिट्टी का काम, नगर पालिका के बर्डपुर मार्ग छठ घाट के दोनों तरफ एप्रोच का निर्माण कार्य, वृक्षारोपण में रोपित पौधे के सुरक्षा हेतु लोहे के टी-गार्ड जिसकी ऊंचाई दो मीटर तथा चौड़ाई दो फीट फीटिंग के साथ आपूर्ति कार्य किया जा चुका है। इन कामों में करीब 50 लाख से अधिक की राशि खर्च की गई है। इसके अलावा कई ऐसे भी काम है, जो नगरपालिका नहीं करा सकती है।

इसमें प्राथमिक विद्यालय का सौंदर्यीकरण सहित अन्य काम शामिल है। इतना ही नहीं इन कामों का टेंडर 11 अक्तूबर के अंक में एक ऐसे समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया है, जो जिले में आता तो है, लेकिन उसकी प्रति सूचना कार्यालय तक सीमित है। सभासद बृजेश पासवान का कहना है कि नियम यह है कि कम से दो ऐसे अखबारों में टेंडर प्रकाशित होने चाहिए, जिनका सर्कुुलेशन जिले में सर्वाधिक हो। जिस अखबार में टेंडर निकाला गया है, वह अखबार न के बराबर है। उसका नाम तक लोग नहीं जानते है। अधिशाषी अधिकारी एसके गुप्ता ने बताया डीएवीपी के आधार पर टेंडर प्रकाशित कराया गया है। कभी भी छोटा बड़ा का भेदभाव नहीं किया जाता है। रही बात काम कराने की तो यह बात निराधार है।
विज्ञापन


डेढ़ साल से दलित बस्ती और मलिन बस्ती में नहीं हुए काम
सभासदों का आरोप है कि नगरपालिका सिद्धार्थनगर की स्थिति बेहद खराब है। यहां पर काम के बाद टेंडर निकाला जाता है। पिछले डेढ़ साल में दलित और मलिन बस्ती विजय नगर और सरोजनी नगर में एक भी काम नहीं कराया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें