श्रावस्ती। हरे आम के पेड़ों की कटान पूर्णतया प्रतिबंधित है। इसके बावजूद इस पर रोक नहीं लग पा रही है। ऐसा दूर दराज क्षेत्र के गांवों में नहीं बल्कि पुलिस चौकी के पीछे हो रहा है। ऐसा ही नजारा गुरुवार को लक्ष्मनपुर पुलिस चौकी के पीछे देखने को मिला। जहां बिना परमिट हरे आम के पेड़ काटे जा रहे थे।
हरे आम के पेड़ों की कटान शासन की ओर से प्रतिबंधित है। इसे विशेष परिस्थितियों में तब काटा जा सकता है जब वृक्ष के स्वामी को उसे काट कर घर बनाना हो अथवा पेड़ इतने पुराने हो चुके हों कि उनके गिरने से जन व धन हानि होने की संभावना हो। अथवा किसी विषम परिस्थिति में उसे तब काटा जा सकता है जब उद्यान विभाग की ओर से यह एनओसी दी जाए कि यह पेड़ अब फल देने योग्य नहीं रहा। या फिर यह कभी भी सूख कर गिर सकता है।
वहीं इसके विपरीत भिनगा कोतवाली क्षेत्र के लक्ष्मनपुर पुलिस चौकी के पीछे बाग में लगे हरे आम के पेड़ों को काटा जा रहा है। इन पेड़ों को काटने के लिए कोई परमिट भी जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद मिली भगत कर ठेकेदार द्वारा इसे काटा जा रहा है। गुरुवार दोपहर तक दो पेड़ों को काट कर गिरा दिया गया। इसके बावजूद न तो स्थानीय पुलिस ने उन्हें टोकना मुनासिब समझा और न ही कोई वनकर्मी ही मौके पर पहुंचा। इस बारे में प्रभागीय वनाधिकारी एपी यादव का कहना है कि उन्हें ऐसी कोई सूचना नहीं है। वन कर्मियों को भेजकर इसकी जानकारी कराई जाएगी।