भिनगा के हनुमानगढ़ी में पट चुका तालाब
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श्रावस्ती। मार्च में ही तेवर दिखा रहे मौसम से पारा चढ़ने लगा है। धूप की तेज होती तपिश के कारण ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व संरक्षा के अभाव में बनवाए गए तालाबों में भी धीरे धीरे पानी सूखने लगा है। भूगर्भ जलस्तर के पहले से ही नीचे जाने के कारण हैंडपंप व ट्यूबवैल में भी पानी छोड़ने का खतरा दिखने लगा है। इससे मवेशियों के पेयजल संकट की आशंका ने ग्रामीणों की परेशानी को और बढ़ा दिया है।
जिले में करीब नौ सौ तालाब चिह्नित हैं। इनमें से मनरेगा योजना के तहत प्रशासन द्वारा करीब साढ़े पांच सौ तालाबों का निर्माण कराया गया है। वहीं वन विभाग द्वारा जंगल में जीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब सोलह जलाशयों का निर्माण कराया गया था। शेष तालाब प्राचीन समय से हैं। इनमें से इकौना व भिनगा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कई तालाबों पर तो स्थानीय लोगों ने कब्जा कर वहां अवैध निर्माण तक करा लिया है। जो तालाब मौजूद बचे हैं, उनमें भी पानी भरवाने की कोई कवायद न होने से वह तेज होती धूप की तपिश के साथ चढ़ते पारे के कारण अब सूखने लगे हैं।
20 फीट तक गिर जाता है भूगर्भ जल का स्तर
भिनगा व जमुनहा विकास क्षेत्र का सामान्य जलस्तर 10 फिट है। जो ग्रीष्म ऋतु में घट कर 15 से 18 फिट चला जाता है। वहीं इकौना व गिलौला क्षेत्र का सामान्य जलस्तर 12-14 फिट है। जो गर्मी में 18-20 फिट तक नीचे चला जाता है। जबकि सिरसिया विकास क्षेत्र का सामान्य जलस्तर 15 फिट है। जो गर्मी के दिनों में 20 फिट तक चला जाता है।
अभी पशुओं में पेयजल संकट जैसी कोई स्थिति नहीं है। जो तालाब सूखने लगे हैं, उनमें अप्रैल माह से पानी भरवाने के इंतजाम सुनिश्चित कराए जाएंगे ताकि मवेशियों को पेयजल संकट न होने पाए। -कमलेश चंद्र बाजपेयी, एडीएम