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रूस के अनुयायियों ने तपोस्थली में की प्रार्थना

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बौद्ध तपोस्थली के भ्रमण को रसिया से आए अनुयायियों ने तपोस्थली में किया प्रार्थना - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। शरद ऋतु समाप्त होने के साथ ही बौद्ध तपोस्थली अनुयायियों से गुलजार होने लगी है। शनिवार को रसिया से आए अनुयायियों ने बौद्ध तपोस्थली पहुंच कर विशेष प्रार्थना किया। इस दौरान उनके द्वारा तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी भी ली गई।
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बौद्ध तपोस्थली पहुंचे रसिया के अनुयायियों ने आनंद बोधि तथा गंध कुटी पर विशेष प्रार्थना की। इसके बाद उनके द्वारा तपोस्थली स्थित शिवली स्तूप, सूर्य कुंड, कौशांबी कुटी, संघाराम बुध विहार आदि पर पर प्रार्थना की गई। इसके बाद श्रीलंका बुद्ध विहार पहुंचे अनुयायियों से बौद्ध भिक्षु श्रद्धालोक महाथेरो ने कहा कि तथागत भगवान बुद्ध एक पेड़ के नीचे चबूतरे पर बैठे हुए थे। हर भक्त की भेंट स्वीकार कर रहे थे। तभी एक वृद्धा आई। उसने कांपती आवाज में कहा, ‘भगवन, मैं बहुत गरीब हूं। मेरे पास आपको भेंट देने के लिए कुछ भी नहीं है। हां, आज एक आम मिला है। मैं इसे आधा खा चुकी थी, तभी पता चला कि तथागत आज दान ग्रहण करेंगे। अत: मैं यह आम आपके चरणों में भेंट करने आई हूं। कृपा कर इसे स्वीकार करें।’
गौतम बुद्ध ने अपने पात्र में एक आधा आम प्रेम और श्रद्धा से रख दिया, मानो कोई बड़ा रत्न हो। वृद्धा संतुष्ट भाव से लौट गई। वहां उपस्थित राजा यह देखकर चकित रह गया। उसे समझ नहीं आया कि भगवान बुद्ध वृद्धा का जूठा आम प्राप्त करने के लिए आसन छोड़कर नीचे तक, हाथ पसार कर क्यों आए। तब उन्होंने पूछा कि भगवन इस वृद्धा में और इसकी भेंट में क्या ऐसी विशेषता है। तब बुद्ध मुस्कुराकर बोले राजन इस वृद्धा ने अपनी संपूर्ण संचित पूंजी मुझे भेंट कर दी। जबकि आप लोगों ने अपनी संपूर्ण संपत्ति का केवल एक छोटा भाग ही मुझे भेंट किया है। दान के अहंकार में डूबे हुए बग्घी पर चढ़कर आए हो। वृद्धा के मुख पर कितनी करुणा और कितनी नम्रता थी। युगों-युगों के बाद ऐसा दान मिलता है। इस दौरान अनुयायियों ने कच्ची कुटी पक्की कुटी तथा विपासना सेंटर आदि का भ्रमण भी किया।
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