कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में विशेष वर्षावास पूजन के तहत मंगलवार को थाईलैंड से आए दल ने विशेष पूजन कीे। थाईलैंड से आए दल ने बौद्ध भिक्षु आनंद सागर के नेतृत्व में विशेष वर्षावास पूजन किया।
बौद्ध भिक्षु आनंद सागर ने कहाकि प्राचीन ग्रंथों के अनुसार पुनर्जन्म के सिद्धांत को गौतम बुद्ध भी मानते थे। पुराने कर्मों के कारण ही मनुष्य अच्छा या बुरा जन्म लेता है। गौतम बुद्ध के अनुसार पुनर्जन्म आत्मा का नही, बल्कि अनित्य अहंकार और वासना का होता है। जिस कारण जन्म और मृत्यु एक प्रवाह के समान होती रहती है। वास्तव में पुनर्जन्म कर्म-कारण के विधान से होता है। मनुष्य की तृष्णा, वासना और घमंड, मीह आदि उत्पन्न करती है तभी मनुष्य कार्य करता है।
अत: इसके कारण को ही नष्ट करना चाहिए अर्थात तृष्णा का नाश करने से मनुष्य कर्म मुक्त हो सकता है और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। बुद्ध किसी भी ईश्वर को नहीं मानते थे। न किसी ईश्वर को वह सृष्टि की उत्पत्ति का कारण मानते थे। उनके अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति कार्य कारण और परिणाम के अनुसार होती है। गौतम बुद्ध को अनीश्वरवादी कहा गया है। दस शील जिनमें अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संग्रह और संपत्ति का त्याग), ब्रह्राचर्य, नृत्य-गान का त्याग, सुगंधित द्रव्यों का त्याग, असमय भोजन का त्याग, कोमल शैय्ता का त्याग व कामिनी कंचन का त्याग शामिल है। पूजन के उपरांत अनुयायियों ने गंध कुटि, शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, कच्ची कुटी पक्की कुटि का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली।