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देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान के विरोधी थे मुखर्जी

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कटरा (श्रावस्ती)। श्यामा प्रसाद मुखर्जी हमेशा ही जम्मू कश्मीर को मिले विशेष राज्य के दर्जा के खिलाफ थे। उन्होंने हमेशा ही इसे राष्ट्रीय एकता के लिए बड़ा खतरा बताते हुए अनुच्छेद 370 का पुरजोर विरोध कर संसद से लेकर सड़क इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। उनका कहना था कि देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान (झंडा) नहीं चल सकते हैं। यह विचार जिला प्रभारी राहुल रस्तोगी ने व्यक्त किए। वह सोमवार को भाजपा के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जयंती सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सेदारी कर रहे थे।
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भाजपा के मंडल अध्यक्ष महाराज प्रकाश तिवारी की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि व जिला प्रभारी राहुल रस्तोगी ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ की। उन्होंने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने 26 जून 1952 को लोकसभा में दिए गए भाषण में इस प्रावधान के खिलाफ आवाज उठाई थी। वह 1943 से 1946 तक अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे। 1953 में जम्मू और कश्मीर पुलिस की हिरासत में उनकी मृत्यु हुई थी। इस मौके पर मंडल अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि सभी लोग श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बताए मार्ग पर चल कर देश के स्वाभिमान की रक्षा को आगे आए।
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