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बच्चों के पोषण और देखभाल संबंधी इंतजामों की हुई पड़ताल

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श्रावस्ती। यूनिसेफ इंडिया की डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव सोमवार को श्रावस्ती पहुंचीं। संयुक्त जिला चिकित्सालय भिनगा पहुंच कर उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों का स्थलीय सत्यापन किया। यूनिसेफ इंडिया की डेप्युटी रेप्रेजेंटेटिव लाना कटाउ ने जिले में बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों का स्थलीय सत्यापन किया। इस दौरान उन्होंने जिला चिकित्सालय भिनगा पहुंच कर लेबर रूम एवं नवजात के लिए चल रहे एसएनसीयू की व्यवस्था देखा।
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उन्होंने इकौना के कंजड़वा जाकर नवजात के घर आशा द्वारा जन्म के 42 दिनों में की जाने वाली विजिट व 15 माह तक बच्चों की देखभाल के लिए की जाने वाली विजिट का सत्यापन भी किया। कहा कि शिशु मृत्यु दर को कम करने में एचबीएनसी एक सकारात्मक पहल है। जिले में आशा द्वारा किए जा रहे इस कार्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। हमें ऐसे कार्यकर्ताओं पर गर्व है जिन्होंने महामारी के दौरान तमाम चुनौतियों के बावजूद भी अपना कार्य को जारी रखा। टीम ने आधार से जुड़े जन्म पंजीकरण के विषय में भी जाना।
यूनिसेफ के प्रदेश प्रोग्राम मैनेजर डॉ. अमित मेहरोत्रा ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण का अधिकार है। यूनिसेफ उनके इन अधिकारों को सुनिश्चित करने के प्रति कटिबद्ध है। टीम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा की जाने वाली बच्चों के विकास की निगरानी एवं पोषण ट्रैकर के विषय में भी जाना। डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव ने कंजड़वा में अति कुपोषित बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के देखभाल करने वालों से बात की।
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यूनिसेफ के सहयोग से चल रहे हैलो दीदी के तहत प्रदेश के तीन जिलों में परिवारों को फोन कॉल, वीडियो एवं मेसेज के माध्यम से पोषण संबंधी जानकारी दी। महादा गांव में मदरसे में चल रहे कार्यक्रम को भी देखा। जहां 6 से 8 वर्ष तक के बच्चों को गणित, हिंदी, उर्दू आदि विषयों का तथा कक्षा 1, 2 एवं 3 का हुनर वर्कशीट के माध्यम से सिखाया जा रहा था।
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