कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को आस्था में डूबी रही। बुद्ध पूर्णिमा पर यंग बोधिसत्व सोसाइटी द्वारा तथागत भगवान बुद्ध की शोभायात्रा निकाली गई जो तपोस्थली के मुख्य मार्गों से होते हुए आनंद बोधि पहुंची। यहां अनुयायियों ने विशेष प्रार्थना की।
विशेष प्रार्थना के दौरान बौद्ध भिक्षु देवेंद्र थेरो ने कहा कि दुनियाभर से बड़ी संख्या में बौद्ध उपासक तपोस्थली में भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा होते हैं। मंदिर और क्षेत्र को रंगीन बौद्ध झंडों के साथ सजाने के अलावा, बौद्ध अपने घरों को रोशनी, मोमबत्तियों और दीयों से सजाते हैं। सुबह की प्रार्थना के बाद भिक्षुओं का रंगारंग जुलूस, बड़े प्रसाद के साथ पूजा, प्रसाद का वितरण होता है। प्रार्थना व उपदेश गूंजते हैं। भगवान बुद्ध की प्रतिमा को धूप, फूल, मोमबत्तियां और फल चढ़ाए जाते हैं।
महाबोधि वृक्ष जिसे पीपल वृक्ष या पवित्र अंजीर के पेड़ के रूप में भी जाना जाता है उसकी भी पूजा की जाती है और प्रसाद भी चढ़ाया जाता है। यह उस वृक्ष के रूप में जाना जाता है जिसके नीचे भगवान बुद्ध ने आत्मज्ञान प्राप्त किया था। परंपरागत रूप से बौद्ध शुद्ध शाकाहारी थे इसलिए मांसाहारी भी इस दिन मांस नहीं खाते हैं। कई स्थानों पर पक्षियों को पिंजरों से मुक्त करना भी एक प्रथा है। लोग अपना पूरा दिन बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं पर आधारित प्रवचन सुनने में व्यतीत करते हैं। इस दौरान बौद्ध भिक्षु यू ओ बाथा, अशोक बौद्ध, आनंद सागर, पवन कुमार बौद्ध, पूजाराम सोनकर, हरिराम बौद्ध आदि मौजूद रहे।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में सोमवार को बुद्ध पूर्णिमा पर प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यंग बोधिसत्व सोसाइटी समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ उप जिलाधिकारी इकौना आरपी चौधरी व सांसद राम शिरोमणि वर्मा ने किया। इस दौरान खीर का प्रसाद के रूप में वितरण किया गया। एसडीएम ने कहा कि आज का दिन पूर्ण है। आज ही के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था इसलिए बौद्ध धर्म में आज के दिन का बहुत ही महत्व है। ऐसे आयोजन कर संस्कृति को बचाए रखना हम सभी देशवासियों का कर्तव्य है। इस दौरान माता मेघा थेरो व माता विद्यावती सहित काफी संख्या में उपासक मौजूद रहे।