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आश्वासन के बाद भी तपोस्थली को अच्छे दिनों का इंतजार

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कटरा(श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती को दूधिया रोशनी से नहलाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही। करोड़ों खर्च के बाद भी तपोस्थली एक सप्ताह भी दूधिया रोशनी की चमक से रोशन नहीं हो पायी है। शासन प्रशासन के तमाम आला अफसरों के दावे व आश्वासन के बाद भी बौद्ध तपोस्थली का अंधेरा नहीं छट पा रहा है। विनियमित क्षेत्र होने के बाद भी तपोस्थली के अच्छे दिन न आने से बौद्ध अनुयायियों में नाराजगी व्याप्त है।
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विश्व को शांति का संदेश देने वाली बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती को भले ही विश्व मानचित्र पर सर्वोच्च स्थान मिला हो लेकिन यहां छाया अंधेरा छटने का नाम नहीं ले रहा। वर्ष 1997 में बौद्ध तपोस्थली को दूधिया रोशनी में रोशन करने के लिए बुद्ध पूर्णिमा पर श्रावस्ती आई तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा करोड़ों की लागत से तपोस्थली को दूधिया रोशनी से जगमग बनाने के प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था।
इसके तहत विनीयमित क्षेत्र श्रावस्ती में लगे सभी विद्युत पोलों पर स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थी। करोड़ों की लागत से लगी यह सोडियम लाइटें एक सप्ताह भी तपोस्थली को रोशन नहीं कर सकी। बौद्ध भिक्षु संघानंद बताते हैं कि बौद्ध तपोस्थली आए पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के साथ ही राज्य व केंद्र के अन्य वरिष्ठ नेताओं द्वारा बौद्ध तपोस्थली का सौंदर्यीकरण करा इसे सुविधा संपन्न बनाने का आश्वासन तो बहुत बार दिया गया लेकिन इस पर अमल अभी तक नहीं हो पाया है।
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बौद्ध अनुयायियों का कहना है कि बुद्ध पूर्णिमा पर विभिन्न देशों से पर्यटक श्रावस्ती आते हैं। प्रकाश व्यवस्था न होने के कारण बौद्ध अनुयायियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। भिक्षु नागलोक व संघरत्न कहते है कि इकौना नगर की तर्ज पर विनीयमित क्षेत्र में भी प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त कराई जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि बुद्ध पूर्णिमा से पूर्व तपोस्थली में विद्युत व्यवस्था में सुधार न हुआ तो बौद्ध अनुयायियों एकजुट होकर प्रशासन मिलकर अपना आक्रोश दर्ज कराएंगे।
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