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परायों पर श्रावस्ती ने कई बार लुटाया अपना प्यार

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श्रावस्ती। राजनीतिक क्षेत्र में श्रावस्ती ने परायों को भी कई बार अपना प्यार दिया है। इसी प्यार की तलाश में कई बाहरी प्रत्याशियों की भीड़ इस समय जिले में है। कोई चुनाव लड़ने के लिए किराए पर मकान ढूंढ़ रहा है तो कोई जमीन तलाश कर मकान बना कर यहीं रहने का दावा कर रहा है।
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श्रावस्ती की धरती ने राजनैतिक व अध्यात्म के क्षेत्र में परायों को भी अपना पूरा प्यार दिया है। इसीलिए भगवान बुद्ध ने भी अपने जीवन काल का 24 वर्षावास इसी धरती पर व्यतीत किया। उनकी यहां से फैली ख्याति विश्व के कई हिस्सों तक पहुंची। ऐसे ही राजनीतिक क्षेत्र में भी इस धरती ने परायों को प्यार देने में कोई भी कमी नहीं छोड़ी। इसीलिए चाहे देवरिया से आए अक्षयवरलाल गोंड हों। या फिर सुल्तानपुर के रहने वाले राम सागर अकेला हों।
सभी को इस धरती ने अपना कर उन्हें राजनीतिक मंच पर स्थापित किया। यहां तक कि अक्षयवरलाल गोंड को इस जिले से तीन बार विधायक बनने का मौका मिला। इसमें से एक बार वह मंत्री भी रहे। यह कतार अभी और भी लंबी है। इस कतार में 1952 व 57 में दो बार विधायक रहे आरके राव, 1980 में विधायक रहे राजकिशोर का नाम शामिल है। यह सभी इस जनपद के निवासी नहीं थे। लेकिन बार-बार यहीं से सदन की रहनुमाई करने के लिए गए। एक बार फिर इस धरती से प्यार पाने के लिए बाहरी नए प्रत्याशियों की भीड़ एकत्र हो रही है। (संवाद)
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ये हैं बाहरी दावेदार
यह भीड़ सबसे ज्यादा भाजपा के खेमे में है। अभी हाल ही में 289 भिनगा विधानसभा सीट से अपना दावा प्रस्तुत करने वालों में भाजपा से कमलेश सिंह कमल (गोंडा) हैं। जबकि सपा से प्रखर कलहंस (बलरामपुर), विनीता यादव (शिकोहाबाद)। वहीं 290 श्रावस्ती विधानसभा सीट से दावा प्रस्तुत करने वालों में भाजपा से आशीष मिश्रा (गोंडा), स्वाती तिवारी (बहराइच) व सपा से अमर यादव गोंडा के रहने वाले हैं।
बाहरियों को हजम नहीं कर पा रही जनता
चुनाव के ठीक पहले आने वाले प्रत्याशियों को इस बार जनता हजम नहीं कर पा रही है। अभी से ही इन प्रत्याशियों के प्रति एक नया माहौल बन रहा है। आम लोगों का कहना है कि जो जनता के बीच पहुंचा ही नहीं उसे अपना नेता कैसे बनाया जाए। यह सभी लोग पद लोलुपता से घिरे हुए हैं। ऐसे में समय आने पर जनता ठोस निर्णय लेगी।
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विधानसभा चुनाव व जीते उम्मीदवार एक नजर में-
चुनाव वर्ष भिनगा विधानसभा इकौना विधानसभा
1952 आर के राव (कांग्रेस) बाबू शिवशरन लाल (कांग्रेस)
1957 आर के राव (कांग्रेस) बाबू शिवशरन लाल (कांग्रेस)
1962 मुन्नु सिंह (स्वत्रंत पार्टी) मंगल प्रसाद (स्वत्रंत पार्टी)
1967 क मला प्रसाद (जनसंघ) भगौती प्रसाद (जनसंघ)
1969 राजा चन्द्रमणि कांत सिंह (कांग्रेस) भगौती प्रसाद (जनसंघ)
1974 कमला प्रसाद वर्मा (जनसंघ) दुलारा देवी (कांग्रेस)
1977 कमला प्रसाद वर्मा (जनसंघ) विष्णुदयाल (जनता पार्टी)
1980 खुर्शीद अहमद (निर्दल) राज किशोर (कांग्रेस)
1985 खुर्शीद अहमद (निर्दल) राम सागर राव (कांग्रेस)
1989 चंद्रमणि कांत सिंह (निर्दल) विष्णु दयाल (भाजपा)
1991 चंद्रमणि कांत सिंह (भाजपा) विष्णु दयाल (भाजपा)
1993 चंद्रमणि कांत सिंह (भाजपा) अक्षयवरलाल (भाजपा)
1998 चंद्रमणि कांत सिंह (भाजपा) अक्षयवरलाल (भाजपा)
2002 चंद्रमणि कांत सिंह (भाजपा) अक्षयवरलाल (भाजपा)
2007 दद्दन मिश्र (बसपा) राम सागर अकेला (बसपा)
2012 इंद्राणी वर्मा (सपा) हाजी मोहम्मद रमजान (सपा)
2017 असलम रायनी (बसपा) रामफेरन पांडे (भाजपा)
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