श्रावस्ती। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए आई आरक्षण सूची में आंकड़ों की बाजीगरी देखने को मिली। जो पंचायतें अनुसूचित जनजाति बाहुल्य थी उन्हें पिछड़े वर्ग के लिए तो जहां केवल कागजों में ही अनुसूचित जाति के लोग दर्ज थे वहां अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का रोस्टर जारी कर दिया गया। इससे उम्मीद यह जताई जा रही है कि एक पंचायत को अपना नुमाइंदा नहीं मिलेगा।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी होने वाली आरक्षण सूची के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है। इस जनगणना के अनुसार सिरसिया विकास खंड के शाहपूुर बरगदवा, परसा देवतहा, डोमाई, पटखौली, में एक एक व्यक्ति को अनुसूचित जनजाति का होना दर्शाया गया है। जबकि इसी विकास खंड के रामपुर देवमन में सात अनुसूचित जनजाति के आंकड़े दर्शाए जा रहे हैं। जबकि देखा जाए तो सिरसिया विकास खंड में केवल भचकाही जहां 1657, कटकुइयां कला जहां 753 व मोतीपुर कला जहां 3015 अनुसूचित जनजाति के लोग निवासरत हैं।
इसी आंकड़े को बेस बना कर इस बार आरक्षण रोस्टर में कटकुइयां कला व मोतीपुर को रोष्टर के तहत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित कर दिया गया। जबकि रामपुर देवमन जहां कागजों में सात अनुसूचित जनजाति व मौके पर एक भी व्यक्ति का न होने के बावजूद इस पंचायत को अनुसूचित जनजाति की स्त्रियों के लिए आरक्षित कर दिया गया है। यह आरक्षण आंकड़ों की बाजीगरी के कारण हुआ। ऐसे में जहां अनुसूचित जनजाति के लोग हैं ही नहीं वहां संभव है कि उन्हें अपना प्रधान न मिल पाए। जबकि जहां अनुसूचित जनजाति की बाहुल्यता है वहां पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधि उनकी नुमाइंदगी करेगा।
2010 के आरक्षण में भी हुई थी समस्या, नहीं मिला था प्रधान
सिरसिया विकास खंड के बलनपुर बसंतपुर ग्राम पंचायत में आरक्षण के दौरान वर्ष 2010 में अनुसूचित जनजाति के लिए प्रधान पद आरक्षित कर दिया गया था। परंतु मौके पर इस पंचायत में एक भी व्यक्ति इस श्रेणी का न होने के कारण पूरे पांच वर्ष यहां पंचायत का गठन नहीं हो सका। ऐसे में ग्राम सचिव ही प्रशासक के रूप में कार्यरत था।
आरक्षण शासनादेश के अनुरूप हुआ है। ऐसे में किस गांव में किस वर्ग के लोग मौके पर हैं या नहीं। इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। इस संबंध में ग्रामीण चाहे तो अपनी आपत्तियां दे सकते हैं। उसका निस्तारण शासनादेश के तहत किया जाएगा। -टीके शिबु, डीएम