वन विभाग की नर्सरी में लगे सहजन के पौध।
श्रावस्ती। वन विभाग ने गुणों का खजाना कहे जाने वाले सहजन के पौधे का अधिक से अधिक रोपण कराने का निर्णय लिया गया है। वन विभाग जिले में एक लाख 94 हजार सहजन के पौधों का रोपण कराएगा। यह पौधरोपण परिषदीय विद्यालय,आंगनबाड़ी केंद्र, सीएचसी, पीएचसी के साथ ही अन्य स्थानों पर पौधरोपण कराया जाएगा। इससे लोगों को मधुमेह नियंत्रण, वजन कम करने, अल्सर के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी फायदा होगा।
जिला अस्पताल के डाॅ. अभिनव पांडेय ने बताया कि सहजन जिसे मोरिंगा भी कहा जाता है, यह किसी औषधि से कम नहीं है। लोग इसका उपयोग सब्जी, सूप व दाल आदि में करते हैं। सहजन में प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, फोलेट, कैल्शियम, आयरन, जिंक, सोडियम, पोटेशियम और विटामिन सी जैसे पोषक तत्व मिलते हैं। इसकी पत्तियों में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, सी, के और बीटा कैरोटीन पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार होता है।
सीएमओ डाॅ. एके सिंह ने बताया कि सहजन बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ बुजुर्गों में बोन डेंसिटी के खतरे को कम करता है। सहजन में विटामिन सी के साथ एंटी ऑक्सीडेंट मिलते हैं। जो सामान्य संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी व एंटी-बैक्टीरियल पाए जाते है, जो अस्थमा, खांसी, और अन्य श्वसन समस्याओं के लक्षणों को कम करने में सहायता करते हैं। सहजन के सेवन से हार्ट भी लंबे समय तक स्वस्थ रहता है। सहजन में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स किडनी से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को डिटॉक्स करता है।
सहजन औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसको खाने से शरीर का कई बीमारियों से बचाव होता है और लंबे समय तक व्यक्ति स्वस्थ रहता हैं। इसके लाभ की जानकारी देने व इसके उपयोग के लिए इस बार वन महोत्सव के दौरान जिले में करीब एक लाख 94 हजार पौधे लगाए जाने है। करीब 90 हजार पौधे विभिन्न विभागों को भेजे जा चुके हैं। आगामी 26 जुलाई का सहजन भंडारा कार्यक्रम आयोजित कर पौधों का वितरण किया जाएगा। साथ ही इसके लाभों की जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
- धनराज मीना, डीएफओ