अघोषित कटौती से लोग बेहाल, किसानों को हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रावस्ती। तराई में मौसम पूरी तरह से गर्म है। आषाढ़ में भी जेठ की तपन का एहसास हो रहा है। चिलचिलाती धूप व लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं। इससे सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक बाजारों में सन्नाटा देखा जा रहा है। जिसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा है। इस बीच होने वाली बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बार बार हो रही कटौती के कारण जहां आम जन बेहाल है।
वहीं किसान भी परेशान हैं। जिले में पारा 43 डिग्री सेल्सियस पार चले जाने के कारण रविवार अब तक के मौसम का सबसे गर्म दिन रहा। सुबह से ही आग उगल रही सूरज की किरणों ने लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया है जिसका असर बाजार में भी दिखा। भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य बाजारों में सुबह ११ बजे से शाम पांचबजे तक सन्नाटा छाया रहा। इसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा है। ग्राहकों के न आने के कारण दुकानदारी घट कर आधा हो चुकी है। ऐसे में तमाम दुकानदार दोपहर बारह बजे से चार बजे तक अपनी दुकान बंद करने लगे हैं। वहीं अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने के कारण लोग बेहाल हैं। वहीं बिजली निगम के जिम्मेदार फाल्ट व ओवरलोड की बात कह अपनी जिम्मेदारी से मुक्ति ले रहे हैं।
बढ़ी अघोषित बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी
मुख्यालय भिनगा में 24 घंटे विद्युत आपूर्ति का रोस्टर होने के बावजूद उपभोक्ताओं को 18 घंटे भी बिजली नसीब नहीं हो रही है। वहीं तहसील मुख्यालयों पर लोगों को 21 घंटे के रोष्टर में चौदह से पंद्रह तो ग्रामीण क्षेत्रों को 18 घंटे के रोस्टर में बारह घंटे भी आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। तहसील मुख्यालयों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में सुबह नौ बजे से एक बजे तक, शाम तीन बजे से छह बजे तक रोष्टर की कटौती हो रही है। इसके साथ ही हर दो घंटे 30 से 50 मिनट तक होने वाली अघोषित बिजली कटौती ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने से जहां उपभोक्ता परेशानी हैं। वहीं खेतों की सिंचाई का कार्य भी बाधित हो रहा है।
दिन में सिंचाई न करें किसान
खेतों में लगी धान की नर्सरी सहित सब्जी आदि की फसलें पानी के अभाव में बर्बाद हो रही है। जिन्हें सूखने से बचाने के लिए किसानों को प्रतिदिन सिंचाई करनी पड़ रही है। वहीं दिन में खेतों में भरा पानी गर्म हो जाने के कारण धान की नर्सरी ही नहीं अन्य फसलें भी बर्बाद हो रही है। ऐसे में फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी व कृषि वैज्ञानिक डा. विनय कुमार ने किसानों से सूर्यास्त के बाद ही खेत की सिंचाई करने की सलाह दिया है। साथ ही किसानों को संभव हो तो छायादार स्थान पर ही धान की नर्सरी लगाने अथवा सीधी बोआई वाले धान का प्रयोग करने की सलाह दी है।
धूप में न ले जाएं पशु
जिले में मौसम का मिजाज पूरी तरह गर्म हो चुका है। ऐसे में पशुपालकों का चाहिए कि वह अपने मवेशियों को सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक धूप में कदापि न निकालें। उन्हें छायादार स्थान पर ही रखें। सुबह शाम ताजा पानी देने के साथ ही थोड़ा गुड़ व हरा चारा खिलाएं। लंपी का टीका उपलब्ध है, पशुपालक अनिवार्य रूप से इसे लगवा लें। मौजूदा समय नि:शुल्क गला घोंटू का टीकाकरण के लिए टीमें गांव गांव जा रही है। ग्रामीण इसमें सहयोग कर अपने पशुओं का अनिवार्य रूप से टीका लगवाएं।
-डाॅ. मानव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी