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पूर्णिमा मेले में शैवाल के बीच ही स्नान करेंगे श्रद्धालु

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इकौना (श्रावस्ती)। पूर्णिमा के दिन सीताद्वार में मेला लगता है। इसमें कई जिलों के श्रद्धालु झील में स्नान करके माता सीता का आशीर्वाद लेते हैं। इस वर्ष सीताद्वार झील की सफाई नहीं की गई है। ऐसे में झील के दूषित जल में ही इस बार श्रद्धालु स्नान कर पवित्र होने को मजबूर रहेंगे।
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सीताद्वार मेले का जिले में ही नहीं बल्कि बलरामपुर, बहराइच, गोंडा व अयोध्या में अपना अलग ही महत्व है। किदवंतियों के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम द्वारा परित्याग किए जाने के पश्चात माता सीता ने इसी झील के किनारे बने बाल्मीकि आश्रम में रहकर लव व कुश को जन्म दिया था। इसी झील के किनारे ही राम के अश्वमेध के घोड़े को पकड़ कर लव व कुश ने राम के साथ ही हनुमान को युद्ध के लिए ललकारा था। पौराणिक मान्यता है कि इस पवित्र झील में कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नानदान करने से मानव के समस्त कष्टों का निवारण होता है।
यही नहीं जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिलता है। उनको भी इस स्थान पर आने से संतान सुख मिल जाता है। इसी मान्यता के चलते इकौना के सीताद्वार झील पर कार्तिक पूर्णिमा के दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। तीन दिन चलने वाले इस विशाल मेले में जिले के ही नहीं अपितु देवीपाटन व अयोध्या मंडल के अन्य जिलों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां की पवित्र झील में स्नानदान के लिए आते हैं। लेकिन इस समय सैकड़ों एकड़ में फैली इस झील में जलकुंभी व शैवाल सहित भीषण झाड़ियां उगी हुई हैं।
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इसे साफ कराने की ओर न तो जिला प्रशासन और न ही इस मंदिर व झील के नाम पर लाखों रुपये कमाने वाला ग्राम पंचायत टंड़वा महंत ही ध्यान दे रहा है। कार्तिक पूर्णिमा मेले को मात्र डेढ़ सप्ताह और शेष बचे हैं। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालु झील के दूषित जल में स्नान कर पवित्र होने के बाद माता सीता का आशीर्वाद लेने को मजबूर रहेंगे। इस संबंध में सीडीओ ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि झील की सफाई के लिए ग्राम प्रधान को निर्देश दिया जा चुका है। मजदूरों से झील की सफाई कराई जाएगी।
फोटो खींचने तक ही सिमटा रहा सफाई अभियान
सीताद्वार झील में शैवाल वर्षों से जमी है। इस झील के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधि व अधिकारियों ने किसी न किसी अभियान के तहत प्रयास किया, लेकिन यह प्रयास महज फोटो खींचाने तक ही सीमित रहा। यही कारण है कि जब भी सीताद्वार में मेले का आयोजन हाता है। तब-तब झील के सफाई का मुद्दा जरूर उठता है।
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