खरगौरा बस्ती में सूखा पड़ा हारिया तालाब
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श्रावस्ती। तराई में मौसम का पारा पूरी तरह शबाब पर है। जंगल व गांवों में बने तालाब पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। जिससे मवेशियों सहित जंगली जानवरों के सामने पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। वहीं शासन की ओर से दिए गए तालाबों में पानी भरवाने के आदेश का अनुपालन न होने के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है।
जिले में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। वहीं पछुआ हवा के कारण लू के थपेड़े लोगों को झुलसा रहे हैं। ऐसे में हर किसी को इससे निजात के लिए पानी की दरकार है। वहीं इसके विपरीत जिले में बने तालाबों में पानी न होने के कारण पड़ी दरार से मवेशियों व जंगली जीवों को पानी के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है। जबकि देखा जाए तो जिले में करीब नौ सौ तालाब मौजूद हैं। इनमें से मनरेगा योजना के तहत करीब साढ़े पांच सौ तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया गया था। जबकि वन विभाग द्वारा जंगल में जीवों को पानी उपलब्ध कराने के लिए करीब सोलह जलाशयों का निर्माण कराया गया था।
इसके अतिरिक्त इकौना व भिनगा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कई तालाबों पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर भवन बना लिया गया है। वहीं जो तालाब मौजूद हैं। वह भी सुरक्षा व संरक्षा के अभाव में चढ़ते पारे के साथ अब सूख रहे हैं। जिनमें अब तक पानी भरवाने की कवायद शुरू नहीं हो सकी है। जबकि शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों सहित जंगल किनारे बने तालाबों में पानी भरवाने का निर्देश दिया जा चुका है। वहीं जंगल में स्थापित तालाब व पहाड़ी नाले लगभग सूखे पड़े हैं। ऐसे में जंगली जीव जंतु पानी के लिए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। जिनका सामना मानवों से हो रहा है। जिससे उनके जान पर खतरा उत्पन्न है।
तालाब में पानी भरवाने के दिए गए आदेश की समीक्षा कराई जाएगी। यदि किसी गांव में शत प्रतिशत तालाब सूखे मिले तो संबंधित ग्राम सचिव के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। -विनय कुमार तिवारी प्रभारी सीडीओ/जिला विकास अधिकारी