श्रावस्ती। परिवार नियोजन के साधनों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जागरूकता मुहिम असर दिखाने लगी है। इसके चलते ही विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष परिवार नियोजन के साधनों का प्रयोग करने वालों की संख्या में 31 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। यह जानकारी मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एपी भार्गव ने दी।
उन्होेंने बताया कि छोटा परिवार - सुखी परिवार की अवधारणा को साकार करने के लिए अब महिलाएं ही नहीं पुरुष भी आगे आ रहे हैं। लोगों में परिवार नियोजन के अस्थायी और स्थायी साधनों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। साथ ही दंपति परिवार नियोजन और दो बच्चों के बीच के अंतराल को लेकर भी अधिक सजग हुए हैं। प्रदेश सरकार के निर्देश पर 11 से 31 जुलाई के मध्य जनसंख्या स्थिरता पखवारा मनाया गया। विगत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष जनसंख्या स्थिरता पखवारा के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो स्पष्ट है कि लोगों तक परिवार नियोजन के साधनों तक लोगों की पहुंच बढ़ी है। विगत वर्ष जहां मात्र 3447 लोगों ने परिवार नियोजन का लाभ लिया। वहीं इस वर्ष इसमें 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई, इस वर्ष 4662 लोगों ने परिवार नियोजन अपनाया।
परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डा. उदयनाथ ने बताया कि वर्ष 2020 में एक भी पुरुष नसबंदी नहीं हो सकी थी जबकि इस वर्ष सात पुरुषों ने नसबंदी कराई। बीते वर्ष 31 तो इस वर्ष 34 महिला नसबंदी हुई। गत वर्ष 22 परिवारों ने आईयूसीडी को अपनाया तो इस साल 117 लोगों ने इसका लाभ लिया। वहीं पिछले साल 499 के मुकाबले इस वर्ष 512 दंपत्तियों ने पीपीआईयूसीडी का लाभ लिया। 147 के मुकाबले इस साल 316 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन लगवाया और 2848 महिलाओं के मुकाबले इस साल 3676 महिलाओं ने गर्भनिरोधक गोलियो का प्रयोग भी किया।