श्रावस्ती। अमर उजाला के तत्वावधान में सोमवार को श्री मुरारी लाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन स्व. चौधरी श्यामता प्रसाद महिला डिग्री कॉलेज में किया गया। इसमें जिले के चार महाविद्यालयों के 17 प्रतिभागियों ने ‘राजनीतिज्ञों की आयु सीमा होनी ही चाहिए’ विषय पर पक्ष एवं विपक्ष में विचार रखा।
प्रतियोगिता का शुभारंभ एमएलके पीजी कॉलेज बलरामपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एसएन सिंह, स्व. श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शिम्मी तिवारी, महामाया राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. उपेंद्र सोनी, वरिष्ठ अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण कुमार द्विवेदी व महामाया राजकीय महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. एसएन वर्मा ने मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मुख्य अतिथि व निर्णायक मंडल के सदस्यों ने विजेताओं को प्रमाण पत्र व पुरस्कार वितरित किया। ज्यादातर प्रतिभागियों ने राजनीतिज्ञों की आयु सीमा होनी ही चाहिए पर अपना विचार केंद्रित किया। प्रतिभागियों का मानना था कि विज्ञान भी मानता है कि जिसका उद्भव होगा उसका क्षरण भी होगा। इसलिए जिस तरह राजनीति में प्रवेश की आयु निश्चित है, उसी प्रकार राजनीति से सन्यास की आयु भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
वहीं इस विषय के विपक्ष में भी प्रतिभागियों ने विचार रखे। इसमें ज्यादातर प्रतिभागियों का मानना था कि उम्र के साथ अनुभव कोई भी निर्णय लेने में बेहतर होता है। राजनीति सेवा का विषय है, इसलिए इसमें आयु सीमा के निर्धारण की कोई जरूरत नहीं है।
प्रतिभागियों ने पक्ष-विपक्ष में अपना विचार उत्तर-प्रतिउत्तर के रूप में रखा। लगभग तीन घंटे तक चले इस वाक युद्ध के बाद निर्णायक मंडल को भी लगभग आधे घंटे तक इन मेधावियों के तर्क पर चिंतन करने का समय लगा। इसी के बाद वह निर्णय ले सके।
दीपांजलि व शालिनी रहीं अव्वल
प्रतियोगिता में स्व. चौधरी श्यामता प्रसाद महिला डिग्री कॉलेज की दीपांजलि श्रीवास्तव व शालिनी पांडे संयुक्त रूप से प्रथम रहीं। इन्हें पांच हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया। द्वितीय स्थान पर सत्य नारायण उच्च शिक्षा संस्थान तुलसीपुर की अपर्णा व अनुराग की टीम रही जिन्हें तीन हजार रुपये व तृतीय स्थान पर महामाया राजकीय डिग्री कॉलेज के सुजीत वर्मा व सत्य नारायण उच्च शिक्षण संस्थान तुलसीपुर के अरुण यादव को दो हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया। सांत्वना पुरस्कार स्व. चौधरी श्यामता प्रसाद महिला डिग्री कॉलेज की सुमन पटेल, रीतू चौधरी व डायट इकौना के अतुल पटेल व रितु चौधरी द्वितीय को मिला। इन्हें अमर उजाला की ओर से सांत्वना पुरस्कार के रूप में एक हजार रुपये का नगद पुरस्कार दिया गया।
प्रतिभागियों ने दिखाया दमखम
चौधरी श्यामता प्रसाद महिला महाविद्यालय की छात्रा दीपांजलि श्रीवास्तव व शालिनी पांडे ने राजनीतिज्ञों की आयु सीमा होनी ही चाहिए के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि विज्ञान व धर्म दोनों ने व्यक्ति की आयु सीमा का निर्धारण अपने-अपने तरीके से किया है। धर्म एक सीमा के बाद वानप्रस्थ पर जाने की सलाह देता है तो विज्ञान शरीर के जर्जर होने के कारण आराम करने की सलाह देता है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति को गैर निर्धारित समय तक काम करने की अनुमति कैसे मिल सकती है जबकि वह स्वयं स्वस्थ न हो। वहीं दूसरा तर्क यह कि जब वोट देने की आयु सीमा निर्धारित है, सभी नौकरियों में आवेदन से लेकर रिटायर होने तक की आयु सीमा निर्धारित है तो फिर राजनीति में क्यों नहीं। अनुभव के तर्क को खारिज करते हुए दोनों ने कहा कि यह सतत प्रक्रिया है कि जब कोई आगे बढ़ता है तो पीछे कतार में खड़े लोग उसका स्थान ग्रहण करते हैं। इसीलिए सभी का अनुभव पीछे वाला एकत्र करते हुए स्वयं अनुभवी बन जाता है। वहीं द्वितीय स्थान पर आने वाले अनुराग श्रीवास्तव व अपर्णा वर्मा ने अनुभव को आधार मानते हुए राजनीति में आयु सीमा पर प्रतिबंध न लगाने का तर्क दिया। तृतीय स्थान पर रहे सुजीत वर्मा व अरुण यादव ने आयु सीमा निर्धारण के पक्ष में विचार प्रस्तुत किया।
ऐसे आयोजनों की होनी चाहिए प्रशंसा
- अमर उजाला द्वारा आयोजित वादविवाद प्रतियोगिता प्रशंसनीय है। ऐसे आयोजन की हर स्तर पर प्रशंसा होनी चाहिए। इससे विकास को नई दिशा मिलती है।
- डॉ. एसएन सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर
- यह आयोजन निश्चित ही समाज को एक नई दिशा देगा। राजनीतिज्ञों की आयु सीमा निश्चित होनी ही चाहिए। आज एक हाल में चर्चा हो रही है। कल पूरा देश चर्चा करेगा।
- श्रवण कुमार द्विवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता व सामाजिक चिंतक
- चर्चा से ही आगे का रास्ता खुलता है। आज जिन मुद्दों पर अमर उजाला प्रतियोगिता के माध्यम से चर्चा कर रहा है, निश्चित ही आने वाला समय परिवर्तन का होगा।
- डॉ. उपेंद्र सोनी
- अमर उजाला के सभी विषय परिवर्तनवादी हैं। आने वाले समय में ऐसे परिवर्तन की मांग पुरजोर होगी। आज इस सभाकक्ष में इसकी शुरुआत हो चुकी है।
-डॉ. एसएन वर्मा