श्रावस्ती। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने की इच्छा रखने वाले 460 छात्रों को प्रवेश दिलाया गया है। इसमें जिले को प्रदेश में पहला स्थान मिला है।
डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि जो अभिभावक निजी विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। उनके लिए निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम वरदान है। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत जिले को शासन से 465 बच्चों का नामांकन मान्यता प्राप्त व निजी विद्यालयों में कराने का लक्ष्य मिला था। इसके तहत 596 बच्चों ने प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। जांच के बाद 487 पात्र आवेदनों की लॉटरी चार चरणों में कराई गई। इसमें लक्ष्य 465 के सापेक्ष 460 बच्चों का नामांकन मान्यता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों में कराया गया, जो लक्ष्य का 98.93 प्रतिशत है। इस प्रकार आरटीई के तहत नामांकन में श्रावस्ती ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत अभिभावक को वर्ष में पांच हजार रुपये उनके खाते में बच्चे के यूनीफाॅर्म, पुस्तक, स्कूल बैग, जूता-मोजा व स्टेशनरी के लिए भेजा जाता है। वहीं जिस विद्यालय में बच्चे का नामांकन हुआ है, उस विद्यालय को प्रति छात्र अधिकतम 450 रुपये फीस प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है।