थानाभवन। आर्य समाज मंदिर में आयोजित ऋषि बोधोत्सव पर महर्षि दयानंद के सिद्धांतों, आदर्शों और उपदेशों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। मुख्य अतिथि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि युवा शक्ति अंधविश्वास, पाखंड से मुक्त राष्ट्र का निर्माण करें।
बृहस्पतिवार को आयोजित कार्यक्रम में वेद मंत्रोच्चार से यज्ञ का शुभारंभ हुआ। ओम ध्वजारोहण के बाद हुई सभा में वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद के बताए मार्ग पर चले, तभी बुराइयों का उन्मूलन संभव है। महापुरुषों के चित्र और वैदिक साहित्य घरों में लाएं, ताकि संतान को सदाचरण की प्रेरक ऊर्जा मिले। बुजुर्ग माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं है। भारत की बेटियां चरित्रवान बनेगी तो परिवार संस्कारयुक्त और बच्चे देशभक्त बनेंगे। भजनोपदेशक पंडित कल्याण वैदिक ने प्रेरक भजनों के द्वारा जीवन में यज्ञ, योग और वैदिक ज्ञान की महत्ता बताई।
भजनोपदेशक राजवीर आर्य ने कहा कि आजादी के आंदोलन में महर्षि ने स्वराज का बिगुल फूंका था। यज्ञ में उमेश चंद गोयल और शेखर दत्त यज्ञमान रहे। महिलाओं को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक साहित्य वितरित किया। आनंद पाल सिंह आर्य, मंगत सिंह आर्य, सतीश आर्य, विमल, देवदत्त आर्य, विवेक गोयल ने विचार रखे। मौके पर ओमवीर आर्य, नरपत आर्य, अमित, हरवीर, सहदेव, राकेश आर्य, पूरण सैनी, दुष्यंत आर्य, रजनीश प्रधान, अमित गोयल मौजूद रहे।