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जहां लावारिस शवों का कराते थे अंतिम संस्कार, आज वहीं खुद की चिता जली

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जहां कराते थे लावारिस शवों का अंतिम संस्कार, वहीं जली चिता
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शामली। पंजाबी कालोनी निवासी भजन गायक अजय पाठक जिस श्मशान घाट पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते थे, उसी में बुधवार को अजय पाठक, उनकी पत्नी और बेटी के शवों का अंतिम संस्कार हुआ।
समाजसेवा के कार्यों में रूचि लेने वाले अजय पाठक आज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके सामाजिक कार्य लोगों के बीच याद किए जाते रहेंगे। लावारिस शवों की बेकद्री होती देख उन्होंने अंतिम संस्कार कराने का बीड़ा उठाया था। इसके लिए उन्होंने अंतिम यात्रा सेवा ट्रस्ट बनाया था। इस ट्रस्ट से जुड़े अन्य समाजसेवी लोगों की मदद से धीमानपुरा फाटक के पास स्थित श्मशान घाट में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते थे। बुुुधवार को उसी श्मशान घाट में अजय पाठक, उनकी पत्नी और बेटी का अंतिम संस्कार हुआ। उनके शव के साथ उनकी पत्नी पत्नी और बेटी की भी चिता एक साथ जली तो लोगों के बीच यहीं चर्चा बनी रही कि जहां वे लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराते थे, आज उसी शमशान में उनकी चिता जली।
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ग्लोबल शांति केयर हॉस्पिटल के डायरेक्टर कुशांक चौहान ने बताया कि अजय पाठक ने लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराने का बीड़ा उठाया था। उन्होंने जब यह बात बताई तो उन्हें भी अच्छा लगा और वे भी इस ट्रस्ट से जुड़ गए।
वरिष्ठ नागरिक सेवा समिति के अध्यक्ष रमेशचंद विश्वकर्मा ने बताया कि अजय पाठक समाज सेवा के कार्यों में आगे रहते थे। लावारिस शवों की बेकद्री न हो, इसके लिए ट्रस्ट बनाने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव को उन्होंने स्वीकार किया और उनके साथ इस कार्य में जुड़ गए।
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समाज सेवी अजय संगल ने कहा कि अजय पाठक आज उनके बीच नहीं रहे, लेकिन समाज सेवा के कार्यों में जो योगदान रहा है, उसे हमेशा याद किया जाएगा। लावारिस शवों के अंतिम संस्कार करने का बीड़ा उन्होंने ही उठाया था।
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