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तापमान बढ़ने से कम 15-20 फीसदी तक घटा गेहूं उत्पादन

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चौसाना में मशीन से गेहूं की कटाई करते किसान। - फोटो : SHAMLI
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शामली। इस बार तापमान समय से पहले बढ़ने से गेहूं का उत्पादन 15-20 फीसदी तक घटा है। मौसम की मार के चलते गेहूं की पछेती फसल समय से 15 दिन पूर्व पककर तैयार हो गई है। कटाई और थ्रेसिंग के बाद गेहूं की फसल का दाना कमजोर हो गया है। जिससे पिछले सालों की तुलना में इस साल एक बीघा में डेढ़ से दो क्विंटल निकासी कम हो रही है।
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गन्ना बेल्ट माने जाने वाले जिले में हर साल गन्ने की कटाई के बाद गेहूं की बुआई होती है। यहां पर तीस से लेकर चालीस प्रतिशत किसान अगेती गेहूं की बुआई करते है। करीब 65 से 70 प्रतिशत किसान गन्ना कटाई के बाद गेहूं की बुआई करते हैं। पिछले सालों में गेहूं का अच्छा-खासा उत्पादन हुआ। कटाई और थ्रेसिंग के बाद गेहूं की निकासी तीन क्विंटल से चार क्विंटल तक आसानी से गेहूं की निकासी होती थी। कुछ प्रगतिशील किसानों के यहां गेहूं की निकासी साढ़े चार क्विंटल तक फसल की निकासी पहुंच जाती थी।
फसल का दाना सिकुड़ा, चमक हुई खत्म
मार्च माह में ही मौसम गर्म होना शुरू हो गया था। अप्रैल माह में गर्म हवाएं चलने से इस साल पंद्रह दिन पूर्व गेहूं की फसल पक कर तैयार हो गई है। जल्दी फसल पकने से गेहूं का दाना कमजोर हो गया और फुटाव नहीं हो पाया है। दाना सिकुड़ गया और चमक खत्म हो गई है। जिले के यमुना खादर के सकौती, खोडसमा समेत कई गांवो में गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग के बाद एक बीघा में दो से ढाई क्विंटल फसल की निकासी हुई है। किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार गेहूं का उत्पादन 15 से लेकर 20 प्रतिशत लुढ़का है।
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50606 हेक्टेयर में हुई थी बुआई
जिला कृषि अधिकारी हरीशंकर चौधरी ने बताया कि इस बार जिले में 50,606 हेक्टेयर में गेहूं की बुआई हुई थी। गेहूं की पकने की स्थिति से पूर्व फसल में पानी की कमी हो जाने से दाना कमजोर और सिकुड़ गया है। इससे गेहूं की उपज का उत्पादन प्रभावित हुआ है। जिले में गेहूं की 46.52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता है।
बाजार मूल्य पर भी पड़ेगा असर
अधिक तापमान का असर पछेती गेहूं की फसल पर पड़ा है। जिले में 70 फीसदी किसान गेहूं की पछेती फसल की बुआई करते हैं। तापमान बढ़ने से गेहूं का दाना पतला और कमजोर रह गया है। गेहूं में दानों की संख्या कम बनी है। लेट बुआई होने और गर्म मौसम होने से गेहूं का उत्पादन 15 से लेकर बीस प्रतिशत लुढ़क गया है। गेहूं के दानों की चमक कम हुई है। दानों में कम चमक होने से बाजार पर असर पड़ने की संभावना है। - डॉ. विकास मलिक, वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र शामली।
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सकौती गांव के किसान सरदार सत्ता सिंह का कहना है कि इस वर्ष मौसम की मार से गेहूं का उत्पादन कम हुआ है। हर साल 4 क्विंटल गेहूं का बीघा उत्पादन आता था। जिससे लागत निकालकर ठीक-ठाक बचत हो जाती थी। इस वर्ष मौसम की मार के कारण 250 बीघा गेहूं की फसल में करीब 500 क्विंटल गेहूं का उत्पादन हुआ है। एक बीघा खेत में दो क्विंटल का उत्पादन हुआ है। मौसम की मार के चलते लागत तो दूर की बात है, कर्जा सिर पर हो गया।
खोड़समा के किसान विनोद कुमार का कहना है कि 20 बीघा गेहूं है। प्रत्येक साल 80 क्विंटल तक अनाज का उत्पादन हो जाता था, लेकिन इस वर्ष 40 क्विंटल की ही उत्पादन है। मौसम की मार इस वर्ष सबसे अधिक रही।
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