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ग्रामीणों ने बेटियों को नहीं भेजा स्कूल

Sun, 14 May 2017 12:06 AM IST
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
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revel - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कांधला। मनमानी फीस वसूलने और विरोध करने पर छात्रा की पिटाई करने को लेकर किवाना स्थित आर्य वैदिक कन्या इंटर कॉलेज प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा भड़क गया।
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गांव हुरमजपुर में पहुंचे स्कूल बस चालक को घेरकर ग्रामीणों ने हंगामा प्रदर्शन किया और करीब 90 छात्राओं को स्कूल भेजने से इंकार कर दिया। उधर, कॉलेज प्रबंधन ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 

कांधला क्षेत्र के गांव किवाना में आर्य वैदिक इंटर कॉलेज है, जिसमें एक हजार से भी अधिक छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। शनिवार को गांव हुरमजपुर में स्कूल बस चालक छात्राओं को लेेेने पहुंचा तो ग्रामीणों ने उसका घेराव करते हुए जमकर हंगामा किया।
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ग्रामीणों की मांग थी कि कॉलेज प्रबंधक अथवा प्रधानाचार्या को मौके पर बुलाया जाए, लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा। इसके चलते ग्रामीणों ने गांव की 90 छात्राओं को कॉलेज भेजने से मना कर दिया और मामले की शिकायत प्रशासन से करके कार्रवाई कराने का निर्णय लिया। कक्षा नौ विज्ञान वर्ग की छात्रा अंशु पुत्री राजेंद्र का कहना है कि शुक्रवार को उसने कॉलेज में अवैध फीस वसूली का विरोध किया था। आरोप है कि इस पर उसे पीटा गया।

 छात्रा रेखा और सुमन ने बताया कि अभिभावकों ने कॉलेज प्रशासन से अपील की थी कि किताबों की कीमतें घटाई जाएं। मगर, कॉलेज से किताबें लेने की बात और पूरे वर्ष की फीस एक साथ जमा करने पर कॉलेज प्रशासन अड़ा रहा।

इसके चलते हमें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। वहीं, छात्रा स्वाति, अर्पिता और शाइना आदि छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन फीस के नाम पर प्रत्येक छात्रा से 8200 से 9000 रुपये की रकम वसूल रहा है। कॉलेज में स्टॉल लगाकर अपनी मर्जी के पाठ्यक्रम खरीदने को मजबूर किया जाता है। पूर्व प्रधान विनोद, मीनू मास्टर, बीरबल, डॉक्टर सुनील, पंकज, कल्लू, ब्रजवीर, राजीव, रामपाल, तेजपाल और बलबीर सिंह आदि मौजूद रहे।  

उधर, आर्य वैदिक कन्या इंटर कॉलेज के प्रबंधक ओमबीर सिंह का कहना है कि कॉलेज में अवैध वसूली का आरोप निराधार है। छात्राओं को स्कूल भेजने से रोकने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर किसी कारण ऐसा हुआ है, तो समस्या का समाधान किया जाएगा। 

कालेज प्रशासन की कोई भूमिका नहीं
प्रधानाचार्या मिथलेश ने बताया कि कक्षा 9 से लेकर 12 तक सभी प्राइवेट किताबें लगाई गई हैं, जोकि बाहर से छात्राएं स्वयं लाती हैं। उसमें कॉलेज प्रशासन की कोई भूमिका नहीं है।

नौ हजार रुपये सालाना फीस और वाहन शुल्क लिया जाता है। उतनी ही रकम की रसीद अभिभावकों को दी जाती है। यदि किसी क्लर्क ने रसीद कम धनराशि की दी है, तो उसके खिलाफ जांच कराकर प्रबंध समिति को रिपोर्ट भेजी जाएगी। वहीं, इसके अलावा उन्होंने छात्रा के साथ मारपीट का आरोप बेबुनियाद है।
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