शामली। गरीब परिवारों की बेटियों के हाथ पीले करने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अनुदान लेने में आपाधापी मची है। इसमें लोगों ने नियमों को भी ताक पर रख दिया। जिनके घरों में एक से लेकर तीन साल पहले तक शादी होने के बाद बेटी को बच्चे भी हो चुके हैं।
वे भी सरकारी इमदाद पाने की लाइन में खड़े हो गए। प्रशासन की जांच में ऐसे फर्जीवाड़े की पोल खुल गई। शामली में योजना के तहत प्राप्त 102 आवेदनों के सत्यापन में 38 अपात्र पाए गए, जबकि केवल 64 आवेदक ही पात्र निकले।
तीन साल पहले हो गई विदाई, पुराने कार्ड से अर्जी लगाई : खेड़ी गांव की काजल ने सामूहिक विवाह योजना के लिए आवेदन किया था। आवेदन में शादी का कार्ड भी लगाया था।
जांच में पाया गया कि उसकी शादी तो तीन साल पहले ही हो चुकी है। यहां तक कि एक बच्चा भी काजल को है। कुरमाली की रहने वाली वकीला ने शादी के तीन साल बाद योजना के लिए आवेदन किया। सत्यापन में खुलासा हुआ कि वकीला को एक बेटा भी है।
दो साल पहले निकाह, फिर भी सरकारी मदद की चाह : कांधला रोड क्षेत्र निवासी सादिया ने भी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का फॉर्म भरा था। सत्यापन में पता चला कि उसकी शादी को दो साल का वक्त बीत चुका है। सादिया के एक बच्चा भी है।