शामली में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम अब जिस भी स्कूल या आंगनबाड़ी सेंटर पर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के लिए जाएगी। सेल्फी उसके कार्य का सत्यापन करेगी। सेंटरों पर न जाने तथा टीम द्वारा कार्य न करने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शासन भी अब सुधार के लिए सेल्फी का सहारा ले रहा है।
कार्यक्रम को और बेहतर बनाने के लिए शासन द्वारा टीम को चेकिंग वाले सेंटर की फोटो खींचकर ग्रुप पर डालनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता तो उस दिन की अनुपस्थिति समझी जाएगी। प्राथमिक चिकित्सा को सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार के प्रयास से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत आंगनबाड़ी सेंटरों, तथा प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण आरबीएसके के डाक्टरों द्वारा किया जाता है।
इसके लिए एक ब्लाक पर दो टीमें लगाई जाती है एक आंगनबाड़ी सेंटर तथा दूसरी आंगनबाड़ी केंद्र के लिए, लेकिन सरकारी अन्य योजनाओं के तहत इस योजना में भी कुछ डाक्टरों ने लापरवाही की इंतहा कर दी थी। डाॅक्टर सेंटर पर नहीं जाते और न ही स्वास्थ्य परीक्षण हो पाता। इस समस्या के लिए समाधान के लिए अब आरबीएसके लखनऊ स्तर के अधिकारियों ने सुधार के लिए आदेश जारी किया है। लखनऊ से जारी आदेश के अनुसार अब सेल्फी आरबीएसके के कार्यों का सत्यापन करेगी।
डाॅक्टरों की टीम अपने कार्यस्थल पर नौ बजे से पहले पहुंचेगी और वहां पर अपनी पूरी टीम के साथ इस अंदाज में सेल्फी लेगी कि इसमें आंगनबाड़ी सेंटर या स्कूल का नाम आ जाए और उसे तत्काल लखनऊ के वाट्सअप ग्रुप पर लोड करेगी। आरबीएसके की लखनऊ से जनरल मैनेजर स्वपना दास ने वाट्सअप पर आदेश जारी कर इसे लागू करने के आदेश दिए है। शामली में यह आदेश लागू किए जा चुके है।